सूबे के मुखिया ने वजीर के विभाग की एक महत्वपूर्ण घोषणा कर दी।
मुखिया से गलती यह हुई कि उन्होंने घोषणा से पहले योजना के बारे में वजीर से चर्चा नहीं की।
अब वजीर कहां यह सब सहन करने वालों में थे। अंदर ही अंदर ठान ली कि जल्दी योजना पूरी नहीं होने देंगे।
जब अधिकारियों ने योजना की फाइल भेजी तो उसमें कई बदलाव करा दिए। दोबारा फाइल तैयार कर भेजी गई तो वजीर ने उसमें कई और बदलाव करा दिए।
अब फिर इस बदलाव में कुछ महीने लग जाएंगे। वजीर के इस व्यवहार पर अब तो विभाग के लोग ही चर्चा करने लगे हैं कि जल्दी यह योजना पूरी नहीं हो पाएगी।
वजीर को यह लगता है कि महत्वपूर्ण निर्णयों पर उनकी सहमति जरूर ली जाए...। जिसमें नहीं ली जाएगी उसे वे किसी भी सूरत में पूरा नहीं होने देंगे...।