तमाम पीसीएस अफसरों को इस सरकार ने पदोन्नति देकर आईएएस बनाया था। स्वाभाविक तौर से पीसीएस से आईएएस बनने वाले हर आईएएस में जिलों का कलेक्टर व कमिश्नर बनने की ललक रहती है।
बेशक थोड़े दिन ही सही। मगर थोक के भाव पीसीएस से आईएएस बने अफसरों में कुछ ही को यह सौभाग्य मिल पाया।
जो पहुंच गए उनमें से कई ने रिटायरमेंट तक टिकने का जुगाड़ बना लिया। जो बचे हुए हैं उनमें काफी फ्रस्ट्रेशन है।
वजह, पीसीएस से आईएएस तो बन गए लेकिन उनका काम नहीं बदला। इस विभाग से उस विभाग का चक्कर काट रहे हैं। हाल ये है कि फाइलों तक में उनकी रुचि नहीं दिखती।
एक वरिष्ठ अधिकारी कहते हैं कि नियुक्ति विभाग को ही इस पर ध्यान देना चाहिए। वह ऐसे अफसरों को आश्वासन देकर ही उनमें काम का जोश भर सकते हैं।