लखनऊ। केजीएमयू में जनरल सर्जरी विभाग के अध्यक्ष प्रो. अभिनव अरुण सोनकर के अनुसार, गॉल ब्लेडर में तीन मिलीमीटर से बड़ी पथरी को गंभीरता से लेना चाहिए। लापरवाही बरतने पर यह कैंसर का कारण बन सकती है। विभाग के 114वें स्थापना दिवस पर आयोजित प्रेसवार्ता में उन्होंने बताया कि पित्त की पथरी जिसे गॉल ब्लेडर स्टोन भी कहा जाता है, एक आम समस्या है। इसका आकार जब तीन मिलीमीटर से अधिक हो जाता है, तो यह गंभीर स्वास्थ्य जोखिम पैदा कर सकती है।
यह पथरी पित्त नलिकाओं में रुकावट पैदा कर सकती है, जिससे संक्रमण और सूजन का खतरा बढ़ जाता है। लंबे समय तक इस स्थिति के बने रहने पर यह पित्त की थैली के कैंसर का रूप ले सकती है। डॉ. अक्षय आनंद ने बताया कि कई बार मरीज पथरी के दर्द को सामान्य समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन यह लापरवाही जानलेवा साबित हो सकती है। समय पर निदान और उपचार न होने पर स्थिति बिगड़ सकती है।
डाॅ. एचएस पाहवा ने कहा कि उन लोगों को जिन्हें पेट के ऊपरी हिस्से में बार-बार दर्द या अपच की शिकायत रहती है, विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। डॉ. गीतिका नंदा सिंह ने नियमित स्वास्थ्य जांच और अल्ट्रासाउंड जांच को पित्त की पथरी का शुरुआती चरण में पता लगाने में सहायक बताया।
17 से 20 फरवरी के बीच आयोजन
विभागाध्यक्ष ने बताया कि स्थापना दिवस के तहत 17 से 20 फरवरी के बीच प्लास्टिक, वस्कुलर, थोरेसिक, ट्रॉमा, आंकोलॉजी पर विशेष सत्र होंगे। इसमें देश भर के डॉक्टर शामिल होंगे।
कैंसर से बचना है तो पसीना बहाएं
प्रो. अभिनव अरुण सोनकर ने बताया कि यह धारणा गलत है कि अगर शराब और धूम्रपान का सेवन नहीं करते हैं, तो शारीरिक व्यायाम की जरूरत नहीं है। आपको कैंसर से बचने के लिए शारीरिक रूप से क्रियाशील रहना जरूरी है। शरीर से बहने वाला पसीना कैंसर के खतरे को भी कम करता है।
दूरबीन विधि से भी संभव है उपचार
डॉ. अक्षय आनंद ने बताया कि पित्त की पथरी के उपचार के लिए कई आधुनिक तरीके उपलब्ध हैं, जिनमें लेप्रोस्कोपिक या दूरबीन विधि की सर्जरी सबसे प्रमुख है। यह न्यूनतम इनवेसिव प्रक्रिया है, जिसमें मरीज जल्दी ठीक हो जाता है। केजीएमयू का जनरल सर्जरी विभाग इस तरह की समस्याओं के उपचार के लिए अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस है।