नगर निगम अधिकारियों की सुस्त कार्यप्रणाली का ही नतीजा है कि तीन साल बाद भी गृहकर सर्वे का काम पूरा नहीं हो सका है।
फिलहाल सर्वे की इस धीमी रफ्तार पर अपर नगर आयुक्त ने जोनल अधिकारियों को फटकार लगाई है। उन्होंने दिसंबर तक काम पूरा करने का निर्देश दिया है।
तीन साल पहले नगर निगम ने गृहकर की बढ़ी हुई दरें लागू की थीं। नगर निगम शहर में अभी 4,75,753 मकानों से गृहकर वसूल करता है।
अब तक महज 3,83,974 मकानों का ही नई दरों के आधार पर गृहकर वसूल करने के लिए सर्वे किया जा सका है। शहर में 91,761 मकानों के सर्वे का काम अब भी नहीं हो सका है।
नगर निगम के जोनल अधिकारियों, कर अधीक्षकों और कर निरीक्षकों की इस ढिलाई के कारण नगर निगम की गृहकर वसूली तो प्रभावित हो ही रही है साथ ही भवनस्वामियाें को भी नुकसान उठाना पड़ रहा है।
जिन मकानों का सर्वे नहीं हुआ और उनका गृहकर जमा हो रहा है। सर्वे के बाद जब बढ़ी हुई दरों के आधार पर इन्हीं भवनों से बढ़ी हुई दरों के आधार पर अंतर की धनराशि ब्याज के साथ जमा कराई जा रही है। इसको लेकर कई बार विवाद भी होता है।
इस पर निगम प्रशासन का तर्कहै कि 2002 से स्वकर निर्धारण प्रणाली लागू है। इसमें भवन स्वामियों को खुद ही गृहकर निर्धारण करने के सुविधा है।
जब भवन स्वामी खुद गृहकर का निर्धारण नहीं करते हैं तो निगम के कर निरीक्षक सर्वे कर उसका कर निर्धारण करते हैं।
गृहकर की नई दरों के लागू होने के तीन साल बाद भी सर्वे का काम पूरा न होने पर अपर नगर आयुक्त विशाल भारद्वाज ने जोनल अधिकरियों को कड़ी फटकार लगाई है।
उन्होंने जोनल अधिकरियों को सख्त हिदायत देते हुए अनावासीय भवनों का पुनरीक्षण कार्य अक्टूबर के अंत तक और आवासीय भवनों का दिसंबर तक हर हाल में पूरा करने का निर्देश दिया है।