पश्चिम बंगाल के डीआईजी सीआईडी ने यूपी एसटीएफ के आईजी को एलटी ग्रेड शिक्षक भर्ती परीक्षा में धांधली के संबंध में सूचना दी थी। एसटीएफ को साल्ट लेक सिटी कोलकाता निवासी अशोक देव चौधरी का भी शिकायती प्रार्थना पत्र मिला, जिसमें दावा किया गया कि यूपीपीएससी की एलटी ग्रेड शिक्षक भर्ती के हिंदी व सामाजिक विषय का प्रश्नपत्र 28 जुलाई 2018 को वाराणसी में आउट कराया गया था। 50 अभ्यर्थियों को एक जगह बुलाकर प्रश्न पत्र पढ़ाया गया था और इसके बदले में अभ्यर्थियों से बड़ी रकम वसूली गई।
एसटीएफ के एसएसपी अभिषेक सिंह ने बताया कि अशोक देव के शिकायती प्रार्थना पत्र की जांच के क्रम में अभ्यर्थियों के नाम व रोल नंबर से मूल आवेदन पत्र की छायाप्रति उपलब्ध कराने के लिए आयोग के सचिव से संपर्क किया गया। जांच में साबित हुआ कि शिकायत में बताए गए सभी अभ्यर्थी 28 जुलाई 2018 को वाराणसी में थे।
एसटीएफ ने इनमें से कुछ अभ्यर्थियों को बुलाकर पूछताछ की तो उन्होंने स्वीकार किया कि मड़ियाहूं, जनपद निवासी अजय चौहान व अजीत चौहान और गोरा बाजार, गाजीपुर निवासी प्रभुदयाल ने उन सभी से 20 लाख रुपये में एलटी ग्रेड परीक्षा पास कराने का ठेका लिया था। सभी 50 अभ्यर्थियों को 28 जुलाई 2018 को वाराणसी में यूपी कॉलेज के पास बुलाकर वहां से लगभग 10 किलोमीटर दूर एक कौशल विकास केंद्र पर ले जाया गया।
परीक्षा नियंत्रक सचिव का मिल रहा था सहयोग
प्रिंटिंग प्रेस के मालिक कौशिक ने बताया कि उसने उत्तर प्रदेश में वर्ष 2018 एलटी ग्रेड शिक्षक भर्ती की परीक्षा का प्रश्नपत्र छापा था। जितने प्रश्नपत्र छापने का ऑर्डर मिला था, उससे कुछ अधिक प्रश्नपत्र छापे गए। इन प्रश्नपत्रों को उसने अपने सहयोगी रंजीत प्रसाद, गणेश प्रसाद शाह व संजय कुमार के माध्यम से परीक्षा के एक दिन पहले 50 अभ्यर्थियों को वाराणसी में हल करवाकर पढ़वाया था।
इसके बदले प्रति अभ्यर्थी 2.50 से 5 लाख तक लेने की बात तय थी। इसके लिए उसने पेपर लेकर अपने सहयोगी अशोक देव चौधरी को भेजा था। कौशिक ने बताया कि उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग की परीक्षा नियंत्रक ने उसे आगामी परीक्षा का प्रश्नपत्र भी छापने के लिए दिया है।
कौशिक ने कबूला कि इस काम में उसे वाराणसी के साथियों संजय, अजीत चौहान, अजय चौहान, प्रभुदयाल का सहयोग मिला। इन सभी का पूरा पता रंजीत प्रसाद की जानकारी में है। 28 जुलाई को पेपर पढ़वाने के बाद रंजीत प्रसाद ने उसे 50 लाख रुपये दिए थे और कहा था कि सभी अभ्यर्थियों के हाईस्कूल, इंटर, स्नातक आदि के मूल शैक्षणिक प्रमाण पत्र उसके पास बतौर गारंटी जमा हैं। परीक्षा परिणाम निकलने के बाद बकाया रकम मिलने पर उसे प्रति अभ्यर्थी ढाई से पांच लाख रुपये दिए जाते, लेकिन अशोक देव चौधरी के विरोध करने के कारण पूरा काम बिगड़ गया।