राज्य कर विभाग में हर महीने 25 से 30 हजार नए करदाता जुड़ रहे हैं। अपीलों का निस्तारण भी तेजी से हो रहा है। समयबद्ध लक्ष्य दिए गए हैं। इसके बावजूद विभाग की ग्रोथ स्थिर है। पिछले वर्ष जून की तुलना में इस साल जून में तो नकारात्मक वृद्धि दर्ज की गई है। इसका एक प्रमुख कारण उत्पादन सूचकांक में राष्ट्रव्यापी कमी को माना जा रहा है, लेकिन विभाग की टीम इस गिरावट के अन्य कारणों की खोज कर रही है।
वस्तु एवं सेवा कर नेटवर्क (जीएसटीएन) ने जून की राज्यवार जीएसटी ग्रोथ जारी की है। इसमें पहली बार नौ राज्य ऐसे हैं, जिनकी ग्रोथ जून में नकारात्मक रही है। इस सूची में गुजरात, पंजाब, चंडीगढ़ और यूपी का नाम भी है। शेष पांच में से चार राज्य नार्थ ईस्ट के हैं। जीएसटी की सबसे तेज ग्रोथ वाले राज्यों में बिहार और झारखंड शामिल हैं। इस बदलाव ने विभाग को भी विश्लेषण पर मजबूर कर दिया है।
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यूपी में निर्यातक तो अच्छे खासे हैं। यहां से करीब दो लाख करोड़ का निर्यात हो रहा है, लेकिन आयातकों की संख्या कम है। आयातकों की संख्या महाराष्ट्र, गुजरात और कर्नाटक में ज्यादा है। इसका राजस्व संबंधी लाभ भी इन्ही राज्यों के करदाताओं को मिलता है। दूसरी तरफ उत्पादन ग्रोथ में राष्ट्रीय स्तर पर कमी आई है, जिसका असर यूपी पर भी पड़ा है। इसके बावजूद राज्य कर विभाग समीक्षा कर रहा है कि शुद्ध जीएसटी आय में राष्ट्रीय स्तर पर 10.7 फीसदी की वृद्धि हुई है।
औद्योगिक और बुनियादी दृष्टि से अपेक्षाकृत पिछड़े राज्यों में रिकॉर्ड 12 फीसदी की ग्रोथ दर्ज की गई है, फिर यूपी में राजस्व की रफ्तार धीमी पड़ने के क्या कारण हो सकते हैं। इसके जरिये विभाग अपने सालाना जीएसटी लक्ष्य 1.75 लाख करोड़ तक पहुंचने का रोडमैप भी तैयार करेगा।