एक समय था जब प्रदेश की प्रति व्यक्ति आय राष्ट्रीय औसत के आसपास हुआ करती थी। लेकिन, जैसे-जैसे समय बीता प्रदेश की चुनौतियां बढ़ती गईं। आज हालात ये हैं कि प्रदेश की प्रति व्यक्ति आय राष्ट्रीय औसत के आधे से भी कम पर अटकी हुई है।
प्रदेश सरकार ने हाल में 15 वें वित्त आयोग के सामने प्रदेश की चुनौतियों की तस्वीर पेश की। इसमें यह कड़वी सच्चाई सामने आई है। आंकड़ों के मुताबिक आजादी के बाद 1950-51 में प्रदेश की प्रति व्यक्ति आय राष्ट्रीय औसत के लगभग बराबर थी। प्रचलित भावों पर प्रदेश की प्रति व्यक्ति आय जहां 259 रुपये थी, राष्ट्रीय स्तर पर यह 267 रुपये थी। केवल तीन प्रतिशत का अंतर था।
लेकिन इसके बाद हर दशक में यह अंतर बढ़ता गया। 2018-19 में यह अंतर 49.1 प्रतिशत पहुंच गया है। इन समस्याओं के पीछे प्रदेश की कठिन परिस्थितियां व लंबे अर्से तक फोकस सेक्टर तय कर काम न होना मुख्य वजह मानी जा रही है। बड़ी संख्या में बेरोजगारी भी इसकी बड़ी वजह है।
शासन के एक वरिष्ठ अधिकारी बताते हैं कि प्रदेश सरकार ने इन चुनौतियों से पार पाने के लिए ही अगले पांच वर्षों में 10 खरब डालर की अर्थव्यवस्था बनाने का लक्ष्य किया है। इसके लिए फोकस सेक्टर तय कर अलग-अलग काम शुरू किए गए हैं।
मसलन, किसानों की आय दोगुना करने के लिए कई कदम उठाए गए हैं तो हर गरीब को आवास, बिजली और पानी पहुंचाने केसाथ इन्फ्रास्ट्रक्चर विकास और औद्योगीकरण के प्रयास शामिल हैं। आयोग से शुरू किए गए प्रयासों को पूरी रफ्तार से जारी रखने के लिए चुनौतियों को ध्यान में रखकर प्रदेश की सहायता बढ़ाने की मांग रखी गई है।
प्रति व्यक्ति आय रुपये में (प्रचलित दरों पर)
वर्ष यूपी राष्ट्रीय अंतर (प्रतिशत में)
1950-51 259 267 3
1960-61 252 306 18
1970-71 486 633 23
1980-81 1278 1630 21
1990-91 3590 4983 28
2000-01 9828 16688 41.1
2010-11 26698 54051 50.06
2018-19 64330 126406 49.1
प्रदेश की मुख्य चुनौतियां
- ग्रामीण क्षेत्र में अधिकतम जनसंख्या
- करीब 65 प्रतिशत लोगों की कृषि पर निर्भरता
- प्रदेश में छोटी-छोटी जोतें
- खनिजों संपदाओं की कमी
- भूमिगत जल स्तर का निम्न होना
- प्रदेश का बुंदेलखंड क्षेत्र सूखा और बंजर ग्रस्त
- पूर्वांचल में बाढ़ की अधिकता
- मानव विकास सूचकांक में नीचे
- जनसंख्या घनत्व अधिक होना