निकायों में कार्यरत अकेंद्रीयित और केंद्रीयित सेवा के कर्मियों के वेतन
को लेकर सालों से चला आ रहा भेदभाव खत्म कर दिया जाएगा।
केंद्रीयित सेवा के
कर्मचारियों को जो लाभ मिल रहा है उसी तरह अकेंद्रीयित सेवा के कर्मियों
को भी लाभ मिलेगा।
कैबिनेट की बैठक में मंजूरी के बाद नगर विकास विभाग ने
उत्तर प्रदेश नगर पालिका अकेंद्रीयित सेवानिवृत्ति लाभ नियमावली- 1984 में
पांचवां संशोधन जारी कर दिया है।
इस पर आपत्तियां मांगी गई हैं। आपत्तियों
के निस्तारण के बाद सेवानिवृत्ति लाभ, पेंशन व पारिवारिक पेंशन की
विसंगतियां दूर हो जाएंगी।
निकायों में दो
तरह के कर्मचारी होते हैं अकेंद्रीयित और केंद्रीयित। अकेंद्रीयित सेवा के
कर्मचारियों की भर्ती का अधिकार निकायों के पास होता है। केंद्रीयित सेवा
के कर्मचारियों की भर्ती लोकसेवा आयोग के माध्यम से होती है।
एक ही विभाग
में काम करने के बाद भी दोनों सेवा के कर्मचारियों को अलग-अलग लाभ दिया
जाता है। अकेंद्रीयित सेवा के कर्मियों ने इस विसंगति को दूर करने की मांग
शासन से की थी।
इसके आधार पर नियमावली में पांचवां संशोधन किया जा रहा है।
अकेंद्रीयित सेवा के कर्मियों की पेंशन या अन्य लाभों की गणना ठीक उसी
प्रकार की जाएगी जैसी केंद्रीयित सेवा के कर्मियों के लिए की जाती है।
निकाय
स्कूलों में कार्यरत शिक्षक व अन्य कर्मचारियों को भी सरकारी सहायता
प्राप्त स्कूलों के समान सुविधाएं और सेवानिवृत्ति का लाभ दिया जाएगा।
तर्क
दिया गया है कि निकाय स्कूल भी माध्यमिक शिक्षा परिषद से सहायता प्राप्त
होने के बाद चल रहे हैं। इसलिए अलग-अलग सुविधाओं का कोई मतलब नहीं है।
इसी
तरह सेवानिवृत्त होने के बाद जिन कर्मियों का निधन हो गया है उनके परिवारों
के पेंशन की विसंगतियां भी दूर हो जाएंगी।