इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने यूपी सरकार को झटका देते हुए बुधवार को राज्य के सभी राज्यमंत्रियों की गाड़ियों से लाल बत्ती हटाने के निर्देश दे दिए हैं।
खंडपीठ का कहना है कि सरकार 10 दिसंबर को दिए गए निर्देश के अनुपालन को सुनिश्चित करे।
गौरतलब है कि प्रदेश में 100 से भी ज्यादा राज्यमंत्री है जो अलग-अलग विभागों में सलाहकार के तौर पर नियुक्त हैं।
दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने 10 दिसंबर को हुक्म दिया था कि लाल बत्ती की गाड़ियों का इस्तेमाल केवल संवैधानिक पदों पर बैठे और अतिविशिष्ट शख्स ही कर सकते हैं।
इसी तरह नीली बत्ती के लिए कोर्ट ने कहा था कि पुलिस, एंबुलेंस और आपातकालीन सेवाओं के वाहनों को ही नीली बत्ती लगाने का हक है।
कोर्ट में लाल व नीली बत्ती का मामला पिछले कई साल से चल रहा था। याचिका में कहा गया था कि राजनीति से जुड़े लोग रसूख दिखाने के लिए गाड़ियों पर लालबत्ती लगाकर घूमते हैं। इससे आम जनता को परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
सुप्रीम कोर्ट ने तीन महीने में देश के सभी राज्यों से एक नई सूची निकालने का कहा था, जिसके तहत संवैधानिक पद को परिभाषित किया जाना था।
हालांकि, उससे पहले ही इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच ने यह फैसला सुना दिया है।