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200 रुपये की दाल 69 रुपये प्रति किलो में देगी यूपी सरकार

Mon, 19 Oct 2015 08:41 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
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दाल की महंगाई से राहत दिलाने के लिए प्रदेश सरकार ने भी कवायद शुरू की है। राज्य कर्मचारी कल्याण निगम के जरिये लोगों को दाल मुहैया कराने का फैसला किया गया है। फिर भी आम लोगों को महंगी दाल से जल्द राहत मिलने की उम्मीद नहीं है।
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वजह, इस दाल के आने में अभी लगभग 15-20 दिन लग सकते हैं। ऊपर से केंद्र सरकार ने प्रदेश को जितनी दाल हर महीने देने का फैसला किया है, उससे सभी को सस्ती दर पर दाल मिल पाना संभव नहीं है।

प्रदेश सरकार ने केंद्र से प्रतिमाह 21 हजार टन अरहर की दाल मांगकर इस संकट से निजात पाने की कार्ययोजना बनाई थी। पर, केंद्र सरकार ने सिर्फ एक राज्य को इतनी दाल देने में असमर्थता जता दी है। कर्मचारी कल्याण निगम के अधिशासी निदेशक एके उपाध्याय के अनुसार, केंद्र ने प्रतिमाह 250 टन दाल देने को कहा है।
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इसके लिए सरकार ने निगम को दो करोड़ रुपये देने की बात कही है। इस धन से केंद्र से दाल लेकर प्रदेश में निगम के जरिये लोगों को दी जाएगी।

यह दाल किस कीमत पर लोगों को मुहैया होगी, इसका अभी फैसला नहीं किया गया है। दाल को मुंबई बंदरगाह से उत्तर प्रदेश लाना होगा। साथ ही इसकी दराई और सफाई करानी होगी क्योंकि विदेश से आने वाली दाल साबुत आ रही है।
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इस तरह तय होगी दाल की कीमत

प्रदेश को यह दाल लगभग 69 रुपये प्रति किलो की दर से मिलेगी। ढुलाई और दराई सहित अन्य खर्च जोड़कर इसका भाव तय किया जाएगा। खाद्य व रसद विभाग के अधिकारियों के अनुसार, दाल को तैयार कराने पर आने वाले खर्च और केंद्र की दर को जोड़कर यह उपभोक्ताओं को लगभग 109 रुपये प्रति किलो में पड़ेगी।

केंद्र से मिलने वाली 250 टन दाल को अगर क्विंटल में बदलें तो यह 2500 क्विंटल होता है। इतनी मात्रा को अगर प्रदेश के 75 जिलों में  बांटे तो एक जिले के हिस्से में 50 क्विंटल दाल भी नहीं आएगी। जाहिर है, इतनी दाल से काम चलने वाला नहीं। प्रदेश में अरहर की दाल का प्रतिवर्ष औसत उत्पादन 12 लाख टन है।

अनुमान के अनुसार, प्रदेश की लगभग 20 करोड़ आबादी की जरूरत पूरी करने के लिए प्रतिमाह लगभग 3 लाख टन और सालाना लगभग 36 लाख टन दाल की जरूरत है। सिर्फ गरीबी रेखा से नीचे वाली सूची में दर्ज और केंद्र के कोटे में शामिल 1 करोड़ 6 लाख परिवारों के लिए प्रतिमाह 21 हजार टन दाल की जरूरत है।
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