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यूपी व केंद्र दोनों जगह भाजपा की सरकार लेकिन लोग अभी भी बदहाल : मायावती

Sun, 07 Jul 2019 12:58 AM IST
Amulya Rastogi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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मीडिया को संबोधित करती हुईं मायावती - फोटो : एएनआई
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बसपा सुप्रीमो मायावती ने कहा है कि आम जनता के हित में मजबूत नहीं बल्कि मजबूर सरकार की जरूरत है। यूपी के पूर्वांचल से पीएम व सीएम दोनों ही आते हैं लेकिन गांव, गरीब, किसान सभी का बुरा हाल है। इन क्षेत्रों से लोगों का मजबूरी में पलायन भी लगातार जारी है। यह बीजेपी सरकार के तमाम दावों को खोखला साबित करता है।
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मायावती ने बसपा प्रदेश मुख्यालय में अवध व पूर्वांचल के संगठन की समीक्षा के बाद पदाधिकारियों व जिम्मेदार नेताओं को संबोधित कर रही थीं। उन्होंने कहा कि केन्द्र व प्रदेश भाजपा की पूर्ण बहुमत सरकार होने के बावजूद लोगों के जीवन में कोई बड़ा बदलाव नहीं आ पाया है। 

इससे स्पष्ट है कि आमजनता के हित में मजबूत नहीं बल्कि मजबूर सरकार की जरूरत है। इससे सरकार के दिल-दिमाग में जनता की भलाई का खौफ  लगातार बना रहेगा तथा न तो सरकार निरंकुश हो सकेगी और ना ही सत्ताधारी पार्टी के लोग अपने आपको कानून से ऊपर समझ सकेंगे।
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उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश में प्राइवेट सेक्टर हर प्रकार लोगों का शोषण कर रहा है। अपराध-नियंत्रण व कानून-व्यवस्था के साथ-साथ विकास के लिए लोग तरस रहे हैं। सरकार ग्रामीण रोजगार के आवंटन में लगातार कटौती कर दैनिक मजदूरों का हाल बदहाल कर रही है। दूसरी तरफ  सात लाख से अधिक सरकारी पदों नियुक्तियां नहीं हो रही हैं जिससे दलित व ओबीसी वर्गो के लोग ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं।
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कल्याणकारी की जगह व्यावसायिक मानसिकता वाली सरकार का बजट

मायावती ने केंद्र सरकार के बजट की आलोचना की है। उन्होंने कहा कि बीजेपी सरकार कल्याणकारी सरकार के बजाय व्यवसायिक मानसिकता वाली सरकार बनती चली जा रही है। देश के आम लोगों की चिंता न कर मुट्ठीभर पूंजीपतियों, उद्योगपतियों व धन्नासेठों के हित में काम कर रही है। 

उन्होंने कहा कि प्राइवेट सेक्टर को हर प्रकार से बढ़ावा देकर देश के विकास व जनहित के मामलो में सरकार अपनी संवैधानिक जिम्मेदारी से क्यों भागना चाहती है? उन्होंने कहा कि देश अभी भी गरीबों का गरीब बना रहना, मजदूर परिवारों की बदहाली, बेरोजगारी का अभिशाप व लोगाें को मूलभूत सुविधा के रूप में उनकी आय नहीं बढ़ना तथा बेहतर सरकारी शिक्षा व स्वास्थ्य की व्यवस्था का अभाव चिंता का विषय है। 
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