उन्होंने बताया कि किसान अन्नदाता है। कड़ी मेहनत से सबके भोजन का प्रबंध करता है। महंगाई के दौर में खेती करना भी मुश्किल है। कम जमीन में ज्यादा उपज के दबाव में किसान उर्वरक इस्तेमाल करते हैं। इससे जहां स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव पड़ता है, वहीं उत्पादन और गुणवत्ता दोनों में गिरावट आने से धन हानि भी होती है।
इन्हीं बातों को ध्यान में रखकर गोपेश्वर गौशाला समिति और मुनींद्र भरत ने प्राकृतिक खेती की ओर किसानों का रुझान बढ़ाने की पहल शुरू की है। इसके तहत किसानों को मुफ्त प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
दक्ष किसान इस तकनीक से गुणकारी उपज पैदा कर रहे हैं।
कार्यशाला में भदेसरमऊ के गिरिजाशंकर मौर्य, आंट गढ़ी सौंरा के विजय बहादुर सिंह, दरियापुर के शमशेर सिंह, रेवरी से रामशंकर, मुंडियारा से सुरेश, कसमंडी कलां के किशन कुमार ने प्राकृतिक खेती के अनुभव बताए।
यह किसान गाय के गोबर से बनी खाद के साथ आम के बाग में गोमूत्र का स्प्रे कर प्राकृतिक खेती का लाभ उठा रहे हैं। गौशाला में तीन सौ से अधिक गौवंश हैं, जिनके गोबर और गोमूत्र से खाद, कीटनाशक और फफूंदनाशक बनाने का मुफ्त प्रशिक्षण लेकर किसान लाभ उठा रहे हैं।