फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

बहुत लाभदायक है फसलों पर गोमूत्र का स्प्रे, जानें क्या-क्या है फायदे

Tue, 06 Mar 2018 02:19 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मलिहाबाद
विज्ञापन
गोपेश्वर कार्यशाला में प्राकृतिक तकनीक से खेती करने के गुर सिखाए - फोटो : amar ujala
विज्ञापन
अब रोगमुक्त फसल, दोषमुक्त पैदावार, शून्य लागत और दोगुनी कमाई भी संभव है। खेतों में पोटाश और फास्फोरस अलग से देने की जरूरत नहीं यह खुद पौधों से मिल जाती है। यह जरूरत गाय के गोबर और गोमूत्र पूरी हो सकती है।
विज्ञापन


अच्छे पौधे की बढ़त यदि डीएपी, एनपीके और यूरिया से ही संभव होता तो सारे जंगल सूख जाने चाहिए। अभी तक ऐसा नहीं हुआ, इसका मतलब माटी और प्रकृति में यह तत्व पहले से ही मौजूद हैं। इन तत्वों को गाय के गोबर और गोमूत्र से बने जीवामृत और घनामृत से जाग्रत किया जा सकता है।

सैकड़ों किसानों ने प्राकृतिक कृषि तकनीक से सफलता की नई कहानियां लिखी हैं। खेती को फायदे का सौदा बनाकर उन्होंने किसानों के बीच मिसाल कायम की है। यह जानकारी गोपेश्वर गौशाला में प्राकृतिक कृषि तकनीक प्रशिक्षण कार्यशाला में सोमवार को दी गई।
विज्ञापन


गौशाला परिवार ने क्षेत्र के किसानों की खातिर अच्छी पहल की है। किसानों को प्राकृतिक तरीके से खेती करने का मुफ्त प्रशिक्षण दिया जा रहा है। किसानों करे कम लागत में अधिक पैदावार के बारे में जानकारी दी गई।

गौशाला में प्राकृतिक तकनीक से तैयार की गई फसलों से किसानों को रूबरू कराया गया। प्रबंधक उमाकांत गुप्ता ने बताया कि खेती में बढ़ते केमिकल के उपयोग से स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है। वहीं लागत अधिक होने की वजह से किसानों की चुनौतियां भी बढ़ रही हैं।
विज्ञापन

गोबर-गोमूत्र की खाद कीटनाशक व फफूंदनाशक

किसान - फोटो : amar ujala
उन्होंने बताया कि किसान अन्नदाता है। कड़ी मेहनत से सबके भोजन का प्रबंध करता है। महंगाई के दौर में खेती करना भी मुश्किल है। कम जमीन में ज्यादा उपज के दबाव में किसान उर्वरक इस्तेमाल करते हैं। इससे जहां स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव पड़ता है, वहीं उत्पादन और गुणवत्ता दोनों में गिरावट आने से धन हानि भी होती है।

इन्हीं बातों को ध्यान में रखकर गोपेश्वर गौशाला समिति और मुनींद्र भरत ने प्राकृतिक खेती की ओर किसानों का रुझान बढ़ाने की पहल शुरू की है। इसके तहत किसानों को मुफ्त प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
दक्ष किसान इस तकनीक से गुणकारी उपज पैदा कर रहे हैं। 

कार्यशाला में भदेसरमऊ के गिरिजाशंकर मौर्य, आंट गढ़ी सौंरा के विजय बहादुर सिंह, दरियापुर के शमशेर सिंह, रेवरी से रामशंकर, मुंडियारा से सुरेश, कसमंडी कलां के किशन कुमार ने प्राकृतिक खेती के अनुभव बताए।
यह किसान गाय के गोबर से बनी खाद के साथ आम के बाग में गोमूत्र का स्प्रे कर प्राकृतिक खेती का लाभ उठा रहे हैं। गौशाला में तीन सौ से अधिक गौवंश हैं, जिनके गोबर और गोमूत्र से खाद, कीटनाशक और फफूंदनाशक बनाने का मुफ्त प्रशिक्षण लेकर किसान लाभ उठा रहे हैं।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें