फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

टीबी के मरीजों को राहत, अब स्प्रे से इलाज

Fri, 25 Apr 2014 10:29 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
विज्ञापन
विज्ञापन
टीबी के मरीजों को भी अब अस्थमा की तरह स्प्रे और इन्हेलर फॉर्म में दवा दी जा सकेगी।
विज्ञापन


सेंट्रल ड्रग रिसर्च इंस्टीट्यूट (सीडीआरआई) ने टीबी की दवा रैपामाइसिन को माइक्रो साइज में एनकैप्सूलेट करने में सफलता हासिल की है।

इस दवा को माइक्रो साइज पार्टिकल वाले पाउडर के रूप में सांस के साथ मरीजों को दिया जा सकेगा। इससे टीबी के बैक्टीरिया को प्रभावी तरीके से खत्म किया जा सकेगा।

अमेरिकन जर्नल एसीएस पब्लिकेशन में प्रकाशित रिसर्च पेपर के मुताबिक, टीबी की दवा रैपामाइसिन को प्रभावी बनाने के लिए इन्हेल किए जा सकने वाले माइक्रो साइज के पार्टिकल में बनाया गया।
विज्ञापन

प्रभावी होगा इलाज

इसके लिए लेजर सेटरिंग और इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कॉपी की मदद लैब में ली गई। टीबी की बीमारी से ग्रसित कोशिकाओं को टारगेट कर इसके असर को भी जांचा गया।

दवा के असर के बीच कोशिकाओं को टॉक्सिक बनाने वाले दवा के तत्वों का भी असर इसमें काफी कम देखने को मिला।

वैज्ञानिकों का कहना है कि आम दवाओं में फ्री रैपामाइसिन का उपयोग होता है। हमने जब मॉडल पर दोनों का इस्तेमाल किया।

इसमें पाया कि फ्री रैपामाइसिन के मॉडल में माइक्रोबैक्टीरियल ट्यूबरक्युलोसिस सर्वाइव कर रही थी। वहीं, सांस के साथ लिए जा सक ने वाले माइक्रोपार्टिकल से माइक्रोबैक्टीरियल ट्यूबरक्युलोसिस को खत्म करने में मदद मिली। इससे मरीजों पर भी उपयोग करने पर टीबी के इलाज को प्रभावी बनाने में मदद मिलने की संभावना बनी है।
विज्ञापन

सफल रहा परीक्षण

वहीं, नए कंपाउंड पर लखनऊ में स्थित प्रमुख ड्रग रिसर्च सेंटर सीएसआईआर-सीडीआरआई की फार्मास्यूटिक्स डिवीजन, इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कॉपी यूनिट के अलावा हाइजिया इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मास्यूटिकल एजूकेशन एंड रिसर्च के फार्मास्यूटिक्स डिवीजन ने काम किया।

इसमें ट्यूबरक्युलोसिस (टीबी) की दवा को सांस के साथ फेफड़ों तक पहुंचाने के लिए पार्टिकल में बदल लिया गया। शोध कर रहे वैज्ञानिकों को इसके काफी अच्छे परिणाम परीक्षण के समय मिले। अब इस दवा को टीबी के मरीजों पर क्लीनिकल ट्रायल के लिए तैयार किया गया है।

यह मिलेगा फायदा
इन्हेलर की मदद से दवा उपलब्ध होने पर टीबी के मरीजों में दवा को बीच में ही छोड़ देने के आंकड़ों में कमी आएगी। इससे एमडीआर टीबी का प्रिवलांस रेट कम होगा। वहीं टीबी का इलाज प्रभावी तरीके से किया जा सकेगा।

वहीं, माइक्रो साइज पार्टिकल में यह दवा लेने में आसान होगी। अस्थमा के मरीजों की तरह स्प्रे कर इस दवा को लिया जा सकेगा। यह दवा खासतौर पर माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरक्युलोसिस बीमारी से पीड़ित मरीजों के लिए मददगार होगी।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें