सरहद पार की रिश्तेदारियों पर राजनैतिक और कूटनीतिक नियमों की ‘स्पांसरशिप’ भारी पड़ रही है।
स्पांसरशिप के नए नियमों के चलते रिश्तेदारियों में पाकिस्तान से राजधानी आने वालों की संख्या हर माह घट रही है।
खुफिया विभाग के एक अधिकारी की माने तो पहले खराब से खराब माहौल में भी हर माह राजधानी में 60 से 70 पाकिस्तानी मेहमान आते थे।
वहीं अब यह संख्या आधी यानी 30 से 35 के बीच रह गई है। अपनों से मिलने के लिए लोगों की बेताबी और नियमों के चलते उनकी बेबसी का अहसास तो होता है लेकिन क्या करें हम भी कानून के आगे मजबूर हैं।
दरअसल, दोनों देशों के रिश्तों में आई तल्खी नियमों को सख्त करने की मजबूरी बन गई। स्पांसरशिप नियम के तहत भारत में रहने वाले व्यक्ति को अपने पाकिस्तानी रिश्तेदार की पूरी जिम्मेदारी लेनी होती है।
उसे जिले के एक राजपत्रित अधिकारी से खुद का सत्यापन कराना होता है। यही सत्यापन लोगों के लिए समस्या का सबब बन रहा है।
जिनके करीबी राजपत्रित अधिकारी हैं उन्हें सत्यापन कराने में ज्यादा दिक्कत नहीं आती, लेकिन जिनकी जान-पहचान नहीं है उन्हें काफी दुश्वारियों का सामना करना पड़ रहा है।
आमतौर पर राजपत्रित अधिकारी पाकिस्तान से जुड़ा मामला होने की बात सुनते ही सत्यापन से इन्कार कर देते हैं।
पहले स्थानीय अभिसूचना इकाई (एलआईयू) अधिकारी खुद जांच करने के बाद अपनी रिपोर्ट लगा देता था और वीजा आवेदन मंजूर हो जाता था। लेकिन गृहमंत्रालय ने अब नई व्यवस्था लागू कर दी है।
राजधानी से सबसे ज्यादा पाकिस्तानी लापता
खुफिया विभाग के लोगों को पाकिस्तानियों के लापता होने का डर भी रहता है। इसलिए वे नियमों को कड़ा बनाए जाने को सही ठहराते हैं। प्रदेश में पाकिस्तान से अब तक आए लोगों में 317 का कहीं अता पता नहीं है। इनमें से सबसे ज्यादा 32 पाकिस्तानी नागरिक राजधानी से लापता हुए हैं।
सही लोग ही आ पाएंगे
न्यू हैदराबाद में रहने वाले असलम (परिवर्तित नाम) और उनके दो चचेरे भाइयों की शादी पाकिस्तान में हुई है। वह स्पांसरशिप के नियम को सही ठहराते हैं। उनका कहना है कि इससे वीजा प्रक्रिया आसान हो गई है।
पहले वीजा की अनुमति मिलने में डेढ़ से दो माह लग जाते थे अब 10 से 15 दिन में वीजा मिल जाता है। असलम का कहना है कि जिन लोगों का परिचित राजपत्रित अधिकारी नहीं होता है उन्हें स्पांसरशिप में दिक्कत आती है।
ये है स्पांसरशिप प्रक्रिया
जो पाकिस्तानी भारत आना चाहते हैं वे पहले इंडियन एंबेसी में आवेदन करते हैं। उस आवेदन की जानकारी भारत में दी जाती है। संबंधित जिला जहां पाकिस्तानी को आना है, वहां रहने वाले उसके रिश्तेदार को जिले के एक राजपत्रित अधिकारी को खुद के सत्यापन की प्रति देनी होती है।
जिसमें अधिकारी उससे परिचित होने की जिम्मेदारी लेता है। इसके बाद उक्त व्यक्ति अपने पाकिस्तानी रिश्तेदार के खर्चे और अन्य बातों की जिम्मेदारी लेकर एक एफिडेविट देता है। ये कागजात भारतीय दूतावास को भेजे जाते हैं।
कागजों की जांच के बाद पाकिस्तानी को भारत आने की इजाजत मिल जाती है। सत्यापन करने वाला राजपत्रित अधिकारी किसी भी महकमे का हो सकता है। राजकीय इंटर कॉलेज के प्रिंसिपल को भी इसका अधिकार है।
वर्ष शहर आए पाकिस्तानी
2011- 437
2012- 375
2013- 260 (अगस्त तक)
लांग टर्म वीजा पर रह रहे हैं 500 पाकिस्तानी
राजधानी में करीब 500 पाकिस्तानी लांग टर्म वीजा पर रह रहे हैं। इनमें करीब 100 पाकिस्तानी मुस्लिम और बाकी हिंदू हैं। इनमें से ज्यादातर ने भारतीय नागरिकता के लिए आवेदन कर रखा है।
यह वीसा सिर्फ तीन श्रेणियों के लोगों को दिया जाता है। पहला वे लड़कियां जिनकी शादियां पाकिस्तान में हुई हों और उन्हें किसी वजह से भारत लौटकर आना पड़ा हो, दूसरी वे पाकिस्तानी लड़कियां जिनकी शादी भारत में हुई हो और तीसरी श्रेणी पाकिस्तान से आए हिंदुओं की होती है।
ये है लांग टर्म वीजा
यह वीजा उन लोगों के लिए है जो पाकिस्तान से आकर यहां लंबे समय तक रहते हैं और भारत की नागरिकता लेना चाहते हैं। यह वीजा अधिकतम पांच वर्ष के लिए होता है। उसके बाद इसका रिन्यूअल कराना होता है।
धारा 88 के तहत अच्छे चाल चलन के बाद इसकी अनुमति दी जाती है। इस वीजा के तहत यहां रहने वाले पाकिस्तानी नागरिकों की निगरानी छह विभागों द्वारा की जाती है।