कोरोना को नियंत्रित करने के लिए सरकार ने अब सार्वजनिक स्थलों पर थूकने को अपराध माना है। केंद्रीय गृह मंत्रालय की नई गाइडलाइन के अनुसार सार्वजनिक स्थलों पर थूकना दंडनीय अपराध है। वहीं इसे मानसिक विकृति के रूप में भी देखा जा रहा है।लोगों से सार्वजनिक स्थानों पर न थूकने की अपील की जा रही है। मनोवैज्ञानिकों की राय है कि बच्चे बड़ों से ही सीखते हैं। जब बड़े लोग सार्वजनिक स्थलों पर थूकेंगे तो यही आदत बच्चे भी सीखेंगे।
यह है नई गाइडलाइनः
- केंद्रीय गृह मंत्रालय की नई गाइडलाइन के अनुसार सार्वजनिक स्थलों पर थूकने को आपदा प्रबंधन कानून के तहत दंडनीय अपराध बना दिया गया है।
- इसके साथ ही सार्वजनिक व कार्यस्थलों पर मास्क पहनना भी अनिवार्य है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय लोगों को लगातार जागरूक कर रहा है कि सार्वजनिक स्थलों पर न थूकें।
लोगोंं को बदलनी होगी आदत
यह है जुर्माने का प्रावधानः
- पहली बार पकड़े जाने पर 200 रुपये, दूसरी बार 500 रुपये, इसके बाद 5000 रुपये का जुर्माना।
- केजीएमयू की बाल मनोवैज्ञानिक व असिस्टेंट प्रोफेसर पूजा माहौर का कहना है कि गुटखा या तंबाकू की अधिकांश सामग्री दक्षिण भारत के राज्यों में पैदा होती हैं, लेकिन दीवारें उत्तर भारत में रंगीन होती हैं। यूपी में कहीं भी थूक देने की आदत सी बन गई है। इस पर रोक के लिए दृढ़ संकल्प की जरूरत है। मजबूत इच्छाशक्ति से ही हम कोरोना के वायरस को फैलने से रोक सकते हैं।
थूक से फैलती हैं सैकड़ों बीमारियां
थूक से सभी तरह के वायरल, बैक्टीरियल और फंगल संक्रमण फैलते हैं। इससे लोगों में सैकड़ों बीमारियां होने की आशंका रहती है। कोरोना के अलावा टीबी, निमोनिया, बैक्टीरियल मेनिनजाइटिस, जुकाम समेत कई तरह के चर्म रोग सिर्फ थूक से फैलते हैं।
केजीएमयू पल्मोनरी एंड क्रिटिकल केयर मेडिसिन विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. वेद प्रकाश का कहना है कि अक्सर लोग समझते हैं कि जब हम सड़क या नाली में थूकते हैं तो इससे कैसे बीमारी फैलेगी? लेकिन जब थूक जूते-चप्पल, मक्खी आदि से हमारे फर्श या स्पर्श वाले स्थान पर स्थानांतरित हो जाता है तो संक्रमण होना स्वाभाविक है।
प्रदेश में सख्ती जरूरी
अधिवक्ता एसपी मिश्रा कहते हैं कि केंद्रीय गृह मंत्रालय ने तो सार्वजनिक स्थल पर थूकने पर दंड का प्रावधान किया है। हालांकि केंद्र सरकार के इस आदेश को विभिन्न जिलों में अलग-अलग तरह से लागू किया जा रहा है। यूपी सरकार को अपने स्पष्ट आदेशों के जरिये इसको सख्ती से लागू करवाने की आवश्यकता है।