लखनऊ। मानसिक तनाव और तेज रफ्तार वाली जीवनशैली संबंधी चुनौतियों के बीच आध्यात्मिक गुरु सद्गुरु के ईशा फाउंडेशन ने 'इनर इंजीनियरिंग' कार्यक्रम के लिए 15 से 18 फरवरी तक निशुल्क रजिस्ट्रेशन ड्राइव शुरू की है। बुधवार को पंजीकरण का आखिरी दिन है।
ईशा फाउंडेशन का कहना है कि पंजीकरण करने वाले प्रतिभागियों को इनर इंजीनियरिंग कार्यक्रम पूरा करने पर शुल्क वापस कर दिया जाएगा। पहल का उद्देश्य अधिक से अधिक लोगों तक मानसिक स्वास्थ्य और आंतरिक संतुलन का व्यावहारिक साधन पहुंचाना है। कार्यक्रम में बताई विधियों व क्रियाओं से तनाव से निपटने, बेहतर निर्णय लेने, रिश्ते मजबूत बनाने आदि के प्रबंधन में संतुलन आएगा।
जानिए, क्या है इनर इंजीनियरिंग कार्यक्रम...
सद्गुरु की ओर से विकसित इनर इंजीनियरिंग कार्यक्रम जीवन को संतुलित और जागरूक ढंग से जीने की योगिक विधा है। इसमें सरल अभ्यासों और जीवन-दृष्टि के जरिये शारीरिक स्वास्थ्य, मानसिक स्पष्टता और भावनात्मक स्थिरता को सुदृढ़ करने पर जोर दिया जाता है। इसका मुख्य अभ्यास 21 मिनट की शांभवी महामुद्रा क्रिया है। इसे शरीर, मन और ऊर्जा प्रणाली में सामंजस्य स्थापित करने का प्रभावी माध्यम माना जाता है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हुए अध्ययनों में इससे तनाव, चिंता और अवसाद में कमी जैसे सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं।
हर पांच में से एक मानसिक रोग से प्रभावित
फाउंडेशन का कहना है कि मानसिक स्वास्थ्य वैश्विक चिंता का विषय बन चुका है। विशेषज्ञों के मुताबिक हर पांच में से एक व्यक्ति किसी न किसी मानसिक रोग से प्रभावित है। लगभग 50 प्रतिशत मानसिक बीमारियां 14 वर्ष की उम्र से शुरू हो जाती हैं और 24-25 वर्ष की उम्र तक इनका आंकड़ा 75 प्रतिशत के करीब पहुंच जाता है। लगातार तनाव, असफलता या दबाव की स्थिति घबराहट, फोबिया और मूड डिसऑर्डर जैसी समस्याएं इसमें शामिल हैं।
चेतना को जागृत करना पहला कदम
ईशा फाउंडेशन के संस्थापक सद्गुरु के अनुसार मानव चेतना को जागृत करना मानसिक संतुलन की दिशा में पहला कदम है। योग इसके लिए प्रभावी माध्यम हो सकता है। सद्गुरु एप पर उपलब्ध ''उप योग'', ''ईशा क्रिया'' जैसे अभ्यास घर पर किए जा सकते हैं। उप योग अभ्यासों का समूह है, जो जोड़ों, मांसपेशियों और शरीर की ऊर्जा प्रणाली को सक्रिय कर थकान व तनाव कम करने में मदद करता है। ईशा क्रिया रोजाना 12 मिनट का ध्यान अभ्यास है। यह मानसिक स्पष्टता, एकाग्रता और शांति बढ़ाने में सहायक माना जाता है।