लखनऊ। पक्षाघात के बाद कई लोगों में भाषा संबंधी समस्या पैदा हो जाती है। इससे वे सामान्य रूप से बोल और समझ नहीं पाते हैं। इसे वाचाघात कहते हैं। इस स्थिति में स्पीच थेरेपी बेहद कारगर है। न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. अपूर्व पौराणिक ने शनिवार को केजीएमयू के न्यूरोलॉजी विभाग में हुए व्याख्यान में यह जानकारी दी।
डॉ. अपूर्व पौराणिक ने कहा कि ऐसा देखा गया है कि पक्षाघात के बाद 30 से 45 फीसदी आबादी की भाषा संबंधी समझ बुरी तरह प्रभावित हो जाती है। वे न तो ठीक से बोल पाते हैं और न ही भाषा समझ पाते हैं। ऐसे मरीजों को स्पीच थेरेपी दी जाती है। इससे कई मामलों में तो मरीज सामान्य बातचीत करने लग जाते हैं। न्यूरोलॉजी विभाग के प्रमुख प्रो. राजेश वर्मा ने बताया कि वाचाघात के बारे में जनजागरूकता की जरूरत है। इस मौके पर डॉ. श्वेता पांडेय और डॉ. पीके शर्मा, भाषाविज्ञानी डॉ. नलिनी रस्तोगी मौजूद रहे।