फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

चार दिन बाद रिटायर हो जाएंगे DGP सुलखान सिंह, 2019 तक जिम्मेदारी संभालने वाले अफसर की तलाश

Wed, 27 Dec 2017 07:03 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
विज्ञापन
डीजीपी सुलखान सिंह - फोटो : amar ujala
विज्ञापन
डीजीपी सुलखान सिंह का कार्यकाल सिर्फ चार दिन बचा है। उन्हें तीन माह का और सेवा विस्तार मिलेगा या नहीं, नया डीजीपी कौन होगा? यूपी में उपलब्ध अधिकारियों में से किसी को यह कुर्सी मिलेगी या प्रतिनियुक्ति से आकर कोई यह जिम्मेदारी संभालेगा? इन बातों को लेकर आजकल अटकलों का दौर जारी है।
विज्ञापन


सूत्रों का कहना है कि सरकार किसी ऐसे डीजी की तलाश में है जो 2019 में होने वाले लोकसभा चुनाव तक यह जिम्मेदारी संभाले। यानी ऐसे डीजी को यूपी पुलिस मुखिया बनाया जाए जिसका कम से कम डेढ़ वर्ष का कार्यकाल बचा हो।

ऐसे में मौजूदा समय में विजलेंस में डीजी हितेश चंद्र अवस्थी, इंटेलीजेंस में डीजी भवेश कुमार और केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर डीजी एसएसबी रजनीकांत मिश्रा का नाम सबसे अधिक चर्चा में है। वहीं अगर वरिष्ठता क्रम में देखा जाए तो नंबर प्रवीण सिंह का है। लेकिन प्रवीण सिंह का कार्यकाल जून 2018 तक ही है।
विज्ञापन


हालांकि इस विकल्प की भी चर्चा है कि प्रवीण सिंह को डीजी बना दिया जाए और उनके रिटायर होने के बाद हितेश अवस्थी को डीजी बनाया जाए। हितेश का कार्यकाल जून 2021 तक है। जबकि भवेश सिंह का कार्यकाल  जनवरी 2020 तक है। वहीं केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर गए रजनीकांत मिश्रा का कार्यकाल अगस्त 2019 तक है।
विज्ञापन

मौजूदा समय में कुल डीजी की संख्या 20 है

- फोटो : amar ujala
दरअसल भवेश कुमार सिंह को डीजी बनाने के लिए कम से कम एक दर्जन आईपीएस अधिकारी जो यूपी में उपलब्ध हैं उन्हें सुपरसीड करना होगा। मौजूदा समय में प्रदेश में कुल डीजी की संख्या 20 है। इसमें मौजूदा डीजीपी सुलखान सिंह और पूर्व डीजीपी जावीद अहमद शामिल हैं।

इसके अतिरिक्त छह डीजी रैंक के अधिकारी केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर हैं जिसमें पूर्व डीजीपी जावीद अहमद भी शामिल हैं। ऐसे में सुलखान सिंह के रिटायरमेंट के बाद प्रदेश में उपलब्ध डीजी रैंक के अधिकारियों की संख्या 13 बचेगी जिसमें भवेश कुमार सिंह का नंबर 12वां है।

उनसे जूनियर केवल डीजी वाराणसी जोन विश्वजीत महापात्रा ही हैं। ऐसे में सरकार या तो वरिष्ठता के आधार पर प्रवीण सिंह को डीजी बना सकती है। लेकिन जातिवाद को लेकर पैदा होने वाले किसी विवाद से बचने के लिए हितेश अवस्थी और रजनीकांत मिश्रा में से किसी एक को भी डीजीपी की जिम्मेदारी दी जा सकती है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें