प्रदेश सरकार ने सांसदों व विधायकों के सम्मान को लेकर प्रशासनिक मशीनरी के स्तर पर कोताही व बार-बार उपेक्षा जैसी शिकायतों को बेहद गंभीरता से लिया है।
विधानसभा की सरकारी आश्वासन संबंधी समिति की सिफारिशों को अमल में लाते हुए शासन ने प्रदेश के समस्त अधिकारियों के प्रशिक्षण में ‘विधानमंडल सदस्यों के प्रति शिष्टाचार/अनुमन्य प्रोटोकॉल’ विषय को शामिल करने का फैसला किया है।
संसदीय कार्य विभाग ने इस संबंध में शासनादेश जारी कर दिया है। दरअसल, विधायकों द्वारा अक्सर शासन के सामने सरकारी अधिकारियों व कर्मियों द्वारा उनकी गरिमा के हिसाब से सम्मान न देने का मामला उठाया जाता रहा है।
विधानसभा में भी यह मामला कई बार उठ चुका है। पिछले दिनों विधानसभा की आश्वासन संबंधी समिति को यह प्रकरण भेजा गया था।
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विधायक सुरेश कुमार खन्ना के सभापतित्व वाली आश्वासन समिति ने विस्तृत विचार-विमर्श के बाद प्रदेश सरकार के सभी अधिकारियों व कर्मचारियों के प्रशिक्षण में प्रोटोकॉल को एक विषय के रूप में शामिल करने की सिफारिश की थी।
इस बैठक में सदस्यों ने शिकायत की थी कि कई बार लोग विधायकों को डीएम, एसपी व एसडीएम तक से नीचे रखते हैं।
अब प्रमुख सचिव संसदीय कार्य ने समिति के सभापति के आदेश के अनुपालन में समस्त प्रमुख सचिवों व सचिवों को शासनादेश जारी कर अधिकारियों व कर्मचारियों के समस्त प्रशिक्षण कार्यक्रम में प्रोटोकॉल विषय को शामिल करने का आदेश दिया है।
इसमें बताया जाएगा कि उन्हें जनप्रतिनिधियों के साथ किस तरह का व्यवहार करना है। इसके अलावा कई अन्य दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।
मुख्य सचिव से भी ऊपर हैं विधायक
विधायक व सांसद प्रोटोकॉल में मुख्य सचिव व एडवोकेट जनरल से भी ऊपर हैं। समिति के सभापति सुरेश कुमार खन्ना ने बैठक में केंद्र सरकार के वारंट ऑफ प्रेसीडेंस का हवाला देते हुए यह बताया।
इसके अनुसार संसद सदस्य 22 नंबर व विधायक 22 (अ) पर, जबकि मुख्य सचिव 24 नंबर पर आते हैं। एडवोकेट जनरल उसके भी बाद में हैं। ऐसे में प्रोटोकॉल में विधायक का स्थान मुख्य सचिव से ऊपर है।
कलेक्ट्रेट में डिस्प्ले होंगे प्रोटोकॉल के निर्देश
सभी जिला मुख्यालयों पर वारंट ऑफ प्रेसीडेंस को ऐसे स्थान पर डिस्प्ले कराया जाएगा जहां से आम लोगों को पता चल सके कि विधायकों व विधान परिषद सदस्यों की प्रोटोकॉल में क्या स्थिति है।
समिति ने इसके लिए शासन को तीन महीने का समय दिया है। इसके अलावा शिष्टाचार (प्रोटोकॉल) के संबंध में जो शासनादेश अब तक जारी किए गए हैं।
उसकी पुस्तिका बनाकर सभी जनप्रतिनिधियों को उपलब्ध कराई जाएगी। समिति ने इसके लिए शासन को चार महीने का समय दिया है।
क्या है वारंट ऑफ प्रेसीडेंस
केंद्र सरकार ने वारंट ऑफ प्रेसीडेंस में सरकारी, गैर सरकारी सेवकों व महानुभावों के संबंध में प्रोटोकॉल का निर्धारण किया है। केंद्र व राज्य सरकारें इसे ध्यान में रखते हुए प्रोटोकॉल संबंधी व्यवस्था का संचालन करती हैं।
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