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विश्वकर्मा जयंती पर विशेष: समाज हित में समर्पित हैं लखनऊ के ये शिल्पी, ऐसे दे रहे योगदान

Tue, 17 Sep 2019 05:38 PM IST
ishwar ashish lucknow, uttar pradesh, india
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- फोटो : amar ujala
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सृजन के देवता भगवान विश्वकर्मा को दुनिया का सबसे पहला इंजीनियर और वास्तुकार कहा जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इन्होंने ही इंद्रपुरी, द्वारिका, हस्तिनापुर, स्वर्गलोक, लंका, जगन्नाथपुरी, भगवान शंकर का त्रिशुल, विष्णु का सुदर्शन चक्र का निर्माण किया था।

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माना जाता है कि विश्वकर्मा वास्तु देव के पुत्र हैं। आज पूरे भारत वर्ष में सृजनकर्ता विश्वकर्मा की जयंती मनाई जा रही है। इस मौके पर हम बात कर रहे हैं शहर के ऐसे शिल्पियों की जिन्होंने अपने सृजन को देश व समाज के हित में समर्पित किया है।

भावी इंजीनियरों ने पर्यावरण संरक्षण को बनाई ईको कार्ट
पर्यावरण संरक्षण व इलेक्ट्रिक वाहनों के प्रयोग पर सरकार काफी काम कर रही है। इसी क्रम में इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (आईईटी) के छात्रों के क्लब ‘एसएई कोलिजिएट क्लब ऑफ आईईटी’ ने महत्वपूर्ण पहल की है। छात्रों ने एक ऐसा ईको कार्ट तैयार किया है, जिसके प्रयोग से पर्यावरण को कोई नुकसान नहीं होगा।
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ईको कार्ट इलेक्ट्रिक वाहन है, जिसमें बीएलडीसी मोटर, 12 बोल्ट की 4 बैटरी, गियर बॉक्स, एआईएसआई स्टैंडर्ड के अन्य मैटेरियल प्रयोग किए गए। पिछले दिनों जीबीटीयू में हुई राष्ट्रीय प्रतियोगिता में भी छात्रों ने इस ईको कार्ट को चलाया। इस टीम का नेतृत्व करने वाले विशेष सिंह ने कहा कि आज ऑटो व्हीकल मार्केट में इलेक्ट्रिक व्हीकल पर पूरा जोर है। सरकार से लेकर आम आदमी तक पर्यावरण संरक्षण के लिए अपने-अपने स्तर पर प्रयास कर रहा है।

इंजन वाले वाहन ज्यादा प्रदूषण पैदा करते हैं। इसे देखते हुए हमने ईको कार्ट का निर्माण किया है। यह सिंगल सीटेड है और इसे अधिकतम 48 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलाया जा सकता है।

व्हीकल इंडस्ट्री को कुछ नया करके देना है मकसद

- फोटो : amar ujala
हमारा उद्देश्य इलेक्ट्रिक व्हीकल इंडस्ट्री को कुछ नया करके देना है। जो एक बार चार्ज करने में कम से कम 500 किलोमीटर तक चले। यह हाई ब्रिड व्हीकल होगा, जो पर्यावरण को संरक्षित भी करेगा और लोगों की जरूरत भी पूरी करेगा।

ईको कार्ट को बनाने वाली 16 छात्रों की टीम में जय ओम उपाध्याय, श्वेतांक राय, अर्पित तिवारी, अनुष्ठा सिंह, अंजली जायसवाल, समीक्षा सिंह, सपना यादव, आनंद मोहन, हरी प्रकाश मिश्रा शामिल हैं।

छात्रों के इस क्लब ने एक गो कार्ट भी डवलप किया है। यह कार्ट सस्पेंशन लेस (स्प्रिंग आदि बेस में नहीं होती) है। सिंगल पर्सन यह रेसिंग कार 79 किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से दौड़ती है। इसका वजन 102 किलोग्राम है।

इसमें 125 सीसी का बाइक का इंजन प्रयोग किया गया है। फरवरी में ग्रेटर नोएडा में आईएसएनईई द्वारा आयोजित राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता ‘डिजाइन चैलेंज- सीजन 6’ में इसने चैंपियन का खिताब जीता है। इसके माध्यम से सीनियर्स अपने जूनियर्स को इनोवेशन के लिए जागरूक भी करते हैं।

प्रधानमंत्री आवास बने ग्रीन बिल्डिंग, इन्होंने दिया योगदान

इंदुशेखर सिंह। - फोटो : amar ujala
एलडीए को पूरे देश में इस समय कम लागत में प्रधानमंत्री आवास को सबसे बेहतर और ग्रीन बिल्डिंग के रूप में बनाने के लिए प्रशंसा मिल रही है। केंद्रीय आवास एवं शहरी विकास मंत्रालय से भी एलडीए के मॉडल को अध्ययन कर दूसरी जगह लागू करने के लिए कहा जा चुका है। इसके लिए सचिव आवास अमृत अभिजात खुद एलडीए के बनाए आवास देखने के लिए लखनऊ आ चुके हैं। इसके लिए इनोवेशन का काम एलडीए के मुख्य अभियंता इंदुशेखर सिंह ने किया।

इंदुशेखर सिंह का कहना है कि बीम, कॉलम के डिजाइन में बदलाव के साथ नए मानकों की स्टील का उपयोग कराया। वहीं, फ्लाईऐश से बने और परंपरागत लाल ईंट की तुलना में एक तिहाई तक कम वजन वाले एएसी ब्लॉक का उपयोग किया। वजन कम होने से बिल्डिंग के स्ट्रक्चर पर लोड कम हुआ। इसकी तुलना में फाउंडेशन को भी कम हैवी बनाया गया। इन सबसे लागत कम करने में मदद मिली। इस कम हुई लागत का उपयोग हमने खिड़कियों में यू-पीवीसी और फर्श व किचन में टाइल्स लगवाने पर खर्च किया। अपने प्रधानमंत्री आवास के लिए अब एलडीए ग्रीन बिल्डिंग सर्टिफिकेट का आवेदन भी करेगा।

प्लास्टिक कचरे का भी तलाशा हल
इंदुशेखर सिंह बिल्डिंग के अलावा सड़कों में भी इनोवेशन करने में जुटे हैं। सड़कों में बिटुमिन का खर्च कम करने और प्लास्टिक कचरे का हल निकालने में वह सफल रहे। अभी तक तीन जगहों पर सड़कें एलडीए प्लास्टिक कचरे का उपयोग कर बना चुका है। 30 प्रतिशत कम लागत से बनी सड़कें तीन गुना अधिक समय तक चलेंगी। प्लास्टिक सही मात्रा में बिटुमिन में मिले। इसके लिए कंप्यूटराइज्ड मिक्सिंग प्लांट उन्होंने अपनी देखरेख में बनवा दिया है। नगर निगम और पीडब्ल्यूडी को भी वह प्रशिक्षण दे रहे।

थर्माकोल के जहाज बनाते-बनाते बना दिया रोबोट

- फोटो : amar ujala
विभूतिखंड में रोहतास अपार्टमेंट में रहने वाले मिलिंद राज तकनीक की मदद से आम जीवन की छोटी-छोटी जरूरतें हल करने में जुटे हैं। ला-मार्टीनियर के छात्र रहे मिलिंद जब पांच साल के थे, तभी से घर पर खराब पडे़ इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों पुराना टेप रिकॉर्डर, टूटी टॉर्च, रिमोट से चलने वाली कार या चाबी भरते ही नाचने वाले बंदर जैसे खिलौनों को खोलकर उनके पुर्जे निकालते और कुछ नया बनाने की कोशिश करते। आठ साल की उम्र में उन्होंने थर्माकोल का जहाज बनाकर उड़ाया तो परिवार के सदस्यों की खुशी का ठिकाना न रहा।

मिलिंद बताते हैं कि जहाज का परीक्षण करने के लिए वह पुलिस लाइन के मैदान में जाते थे। मिलिंद का पहला उड़ता जहाज उनके सपनों को बदलों के पार ले गया। रोबोटिक साइंस मिलिंद का ख्वाब था। वह स्कूल में पूरा वक्त अपने इसी ख्वाब को पूरा करने के लिए साइंस जरनल व अन्य किताबें पढ़ते रहते।

उन्होंने कई छोटी-छोटी मशीनें बनाईं। 12 साल की उम्र में उन्हें ‘फ्लॉवर ऑफ द ईयर’ का अवॉर्ड दिया गया। वह लामार्ट स्कूल के बेस्ट रोबोटिक्स छात्र रहे। स्कूल के बाद उन्होंने फ्लाइंग रोबोट बनाने पर काम किया और डेढ़ साल की मेहनत के बाद ड्रोन बनाया।
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पूर्व राष्ट्रपति कलाम को दिखाया अपना प्रयोग

- फोटो : amar ujala
24 दिसंबर 2014 को पूर्व राष्ट्रपति व मिसाइलमैन डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम कॉल्विन तालुकेदार्स के एक कार्यक्रम में आए, जहां मिलिंद ने उनसे मुलाकात कर अपना ड्रोन दिखाया। बाद में उन्होंने ड्रोन से कई प्रदर्शन किए। नाले में गिरे एक कुत्ते को सकुशल बाहर निकालने का भी काम किया। मिलिंग को वर्ष 2017 में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ‘यंग अचीवर’ अवॉर्ड से सम्मानित किया।

उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस से युक्त ह्यूमनायड रोबोट भी बनाया है, जिसका प्रदर्शन हाल ही में यूपी इन्वेस्टर समिट में किया था। उनके ह्यूमनायड ने राष्ट्रपति रामनाथ कोविद को फूल देकर सम्मानित किया था।

उन्होंने अपने घर पर ही एक हाइटेक रोबोटिक लैब बनाई है, जहां रोबोटिक इंजीनियरिंग में रुचि रखने वाले बच्चों को प्रशिक्षण व प्रयोग करने के मौके मिलते हैं। मिलिंग का कहना है कि वह देश के डिफेंस सिस्टम के लिए जरूरी मशीनें और रोबोट बनाना चाहते हैं।
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