अग्निपथ योजना के विरोध को देखते हुए शासन ने आर्मी कोचिंग सेंटरों पर विशेष निगरानी के निर्देश दिए हैं। कुछ जिलों में कोचिंग सेंटर संचालकों द्वारा छात्रों को भड़काने का मामला सामने आने के बाद ये निर्देश दिए गए हैं। आगरा में 8 कोचिंग सेंटर संचालकों से बाति कर पुलिस ने सेंटरों को बंद करा दिया है।
सूत्रों के अनुसार शनिवार को अलीगढ़ में कोचिंग संचालकों की भूमिका सामने आने के बाद उन्हें गिरफ्तार किया गया था। इसके अलावा आगरा और मथुरा से भी कुछ कोचिंग संचालकों को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई। आगरा में जिला पुलिस ने कोचिंग संचालकों से बात करने अग्निपथ योजना का विरोध शांत होने तक बंद रखने का निर्देश दिया है। पुलिस की ओर से कहा गया है कि यहां अभ्यर्थियों के साथ अराजक तत्व भी शामिल हो सकते हैं और तोड़फोड़ कर सकते हैं।
वाराणसी पुलिस आयुक्त ए सतीश गणेश ने भी कोचिंग सेंटरों को चेतावनी दी है कि अगर हिंसा हुई तो संचालकों की जिम्मेदारी तय की जाएगी। वाराणसी के पुलिस आयुक्त ने बताया कि अब तक दर्ज हुए मुकदमों में 27 लोगों की गिरफ्तारी हुई है और 67 अन्य लोगों की पहचान की गई जिनकी तलाश की जा रही है। उन्होंने बताया कि जो छात्र उपद्रव और तोड़फोड़ में शामिल थे, उनकी सूची तैयार कर सेना भर्ती कार्यालय को भेजा जाएगा। सरकारी संपत्तियों के नुकसान का आंकलन भी चल रहा है, नुकसान की भरपाई ट्रिब्यूनल से कराई जाएगी।
अब तक 34 मुकदमे दर्ज, 387 गिरफ्तार
डीजीपी मुख्यालय के आंकड़ों के अनुसार अब तक अग्निपथ योजना का विरोध करने वालों पर 14 जिलों में 34 मुकदमे दर्ज कर 387 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। गिरफ्तार लोगों में 145 का चालान शांति भंग की आशंका में किया गया है। एडीजी कानून व्यवस्था प्रशांत कुमार ने बताया कि शांति भंग की आशंका में बलिया में 109 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। मथुरा में 70 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। इसमें शांति भंग की आशंका में 27 लोग गिरफ्तार हैं। इसी तरह जौनपुर में 41, अलीगढ़ में 35, मिर्जापुर में 29, वाराणसी में 27, चंदौली में 25, गाजीपुर में 23, गौतमबुद्धनगर में 15 और फर्रुखाबाद में चार लोगों की गिरफ्तारी हुई है। गोरखपुर, देवरिया और फिरोजाबाद में मुकदमे तो दर्ज किए गए हैं, लेकिन गिरफ्तारी किसी की नहीं हुई है।