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यूपीः वक्फ बोर्ड की विशेष ऑडिट संबंधी फाइल चोरी, केस दर्ज, मंत्री बोले- बाबुओं की मिलीभगत

Thu, 12 Mar 2020 04:07 PM IST
Vikas Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ

सार

राजधानी में सुरक्षा व्यवस्था से लैस बापू भवन स्थित उ.प्र. अल्पसंख्यक कल्याण एवं वक्फ अनुभाग-2 से शिया-सुन्नी वक्फ बोर्ड की पिछले पांच साल के ऑडिट कराए जाने संबंधी फाइल चोरी हो गई है।
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वक्फ बोर्ड - फोटो : SELF
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राजधानी में सुरक्षा व्यवस्था से लैस बापू भवन स्थित उ.प्र. अल्पसंख्यक कल्याण एवं वक्फ अनुभाग-2 से शिया-सुन्नी वक्फ बोर्ड की पिछले पांच साल के विशेष ऑडिट कराए जाने संबंधी फाइल चोरी हो गई है। इसे लेकर वक्फ बोर्ड के अनुभाग अधिकारी राम भरत ने हजरतगंज थाने में एफआईआर दर्ज कराई है। वक्फ राज्य मंत्री मोहसिन रजा ने कहा कि ऑडिट से संबंधित फाइलें गायब होने के पीछे वक्फ बोर्ड और सचिवालय के अल्पसंख्यक कल्याण एवं वक्फ अनुभाग-2 के बाबुओं का हाथ है। सरकार दोषियों को चिह्नित कर उन पर कड़ी कार्रवाई करेगी। वक्फ संपत्तियों का अब गरीबों के हित में ही इस्तेमाल होगा।

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बता दें कि दोनों बोर्ड में हुई अनियमितताओं पर पिछले दिनों सीएम योगी ने सीबीआई जांच की सिफारिश की थी। ऐसे में फाइल का गायब होना महज संयोग है या साजिश इसकी पड़ताल पुलिस करेगी। हालांकि सीबीआई जांच अभी शुरू नहीं हुई है। बोर्ड के विशेष ऑडिट संबंधी पत्रावली 17 मई, 2017 को तत्कालीन समीक्षा अधिकारी अजीम को मार्क की गई थी। शुरुआत में फाइल की रफ्तार काफी तेज थी।

17 मई से 6 जून के बीच आठ बार अनुसचिव, संयुक्त सचिव, विशेष सचिव व समीक्षा अधिकारी के बीच फाइल इधर से उधर होती रही। 6 जून को वापस अजीम के पास पहुंची। पत्रावली पर अंतिम मार्किंग 4 अगस्त, 17 की है। पहले फाइल को अनुसचिव व संयुक्त सचिव के लिए मार्क किया गया। वहां उसी तारीख में फाइल अजीम को मार्क की गई। तब से फाइल गायब है।

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'सपा शासन के आखिरी दिनों में वक्फ बोर्ड से संबंधित फाइलें इधर-उधर फेंकी गईं'

वक्फ राज्य मंत्री मोहसिन रजा ने कहा कि सपा शासन के आखिरी दिनों में वक्फ बोर्ड से संबंधित फाइलें इधर-उधर फेंकी गईं। इन्हें हमने हजरतगंज थाने भिजवाया। इन फाइलों की भी गंभीरता से जांच किए जाने की आवश्यकता है। मुस्लिम समाज के इंसाफ पसंद बुद्धिजीवी लंबे समय से वक्फ संपत्तियों की लूट की जांच की मांग कर रहे थे। इसलिए योगी सरकार ने मामले की सीबीआई जांच की सिफारिश की है।

स्थिति यह है कि वक्फ बोर्डों का सरकारी ऑडिट ही नहीं कराया गया। जो थोड़ा-बहुत ऑडिट हुआ, वे फाइलें ही गायब करवा दी गईं। प्रथमदृष्टया इसमें वक्फ बोर्ड के साथ-साथ शासन के अल्पसंख्यक कल्याण एवं वक्फ अनुभाग-2 के कार्मिकों की मिलीभगत साफ नजर आती है।

वक्फ राज्यमंत्री ने कहा कि अभी तक जो वक्फ संपत्तियां खुर्द-बुर्द की गई हैं, उन्हें वापस लाने के लिए योगी सरकार प्रतिबद्ध है। इन संपत्तियों का इस्तेमाल गरीब-गुरबों की मदद में किया जाएगा। प्रदेश में एक लाख रुपये से ऊपर की करीब 1.30 लाख शिया और सुन्नी वक्फ संपत्तियां हैं। नियमानुसार इनका ऑडिट भी कराया जाएगा।
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