लोकसभा चुनाव से पहले ही सही, प्रदेश सरकार अपने एक और चुनावी वादे पर तेजी से अमल की तैयारी में जुट गई है।
गरीबों को मुफ्त साड़ी और कंबल बांटने की योजना सरकार नए साल में हर हाल में शुरू कर देना चाहती है।
अब बुनकरों से 60 की जगह 40 फीसदी साड़ियां ही खरीदी जाएंगी। बाकी साड़ियां अन्य संस्थाओं से खरीदी जाएंगी।
विधानसभा चुनाव के दौरान सपा ने अपने घोषणा पत्र में 18 वर्ष से ऊपर की महिलाओं को दो-दो साड़ी और बुजुर्गों को हर साल एक-एक कंबल देने का वादा किया था।
पार्टी ने सत्ता में आने के बाद मुफ्त साड़ी -कंबल वितरण की घोषणा भी कर दी, लेकिन इसकी खरीद की नीति व प्रक्रिया तय करने में ही पौने दो साल बीत गए।
पंचायतीराज मंत्री बलराम यादव का कहना है कि गरीबों को साड़ी-कंबल देने के साथ ही बुनकरों को ज्यादा से ज्यादा फायदा देने के लिए उनसे 60 प्रतिशत साड़ियां खरीदने का फैसला हुआ था, मगर बाद में बुनकरों ने इतनी अधिक मात्रा में साड़ी दे पाने में असमर्थता जता दी।
इसे देखते हुए अब बुनकरों से 40 प्रतिशत साड़ियां ही खरीदी जाएंगी। इसके लिए विपणन केंद्र बनाए जा रहे हैं। मंत्री ने बताया कि साड़ी-कंबल का वितरण जल्द से जल्द शुरू करने के प्रयास किए जा रहे हैं।
जिला स्तर पर पैसा पहले ही भेज दिया गया है। माना जा रहा है कि सरकार के इस फैसले से नेशनल टेक्सटाइल कॉर्पोरेशन (एनटीसी) तथा प्रदेश की सरकारी संस्था यूपिका व यूपी हैंडलूम कॉर्पोरेशन से अधिक मात्रा में साड़ियां खरीदी जा सकेंगी।
इससे साड़ी-कंबल का वितरण एक बार शुरू होने के बाद फिर ठप होने की नौबत नहीं आएगी।