भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी द्वारा मीडिया के सामने पार्टी का चुनाव चिन्ह लेकर आने से उनके विपक्षियों को बोलने का मौका मिल गया है।
सपा के प्रदेश प्रवक्ता राजेंद्र चौधरी ने कहा कि लोकसभा चुनाव के दौर में भाजपा का आचरण लोकतंत्र की मर्यादाओं के विपरीत है।
मोदी ने प्रेस वार्ता में चुनाव चिह्न दिखाकर दर्शा दिया है कि उन्हें आचार संहिता या राजनीतिक शिष्टाचार की जरा भी चिंता नहीं है।
उनका जैसा घमंडी और तानाशाही मानसिकता वाला व्यक्ति लोकतंत्र के लिए घातक है। निर्वाचन आयोग को चाहिए कि मोदी का चुनाव रद्द करने के साथ ही उनको एक निश्चित अवधि तक लड़ने से प्रतिबंधित कर देना चाहिए।
मोदी भाजपा पर थोपे गए
सपा का मानना है कि मोदी प्रधानमंत्री पद के लिए योग्य प्रत्याशी नहीं हैं। मोदी आरएसएस, बजरंग दल और विश्व हिंदू परिषद के प्रत्याशी हैं जो भाजपा पर थोप दिए गए हैं।
गौरतलब है कि बुधवार को गुजरात की सभी 26 लोकसभा सीटों के लिए मतदान हुआ, जिसमें मतदान के बाद मीडिया से बात करते हुए नरेंद्र मोदी अपने एक हाथ में कमल का फूल पकड़े रहे।
जिस पर कांग्रेस ने भी कड़ी आपत्ति जताई क्योंकि आचार संहिता लागू हो जाने के बाद कोई प्रत्याशी प्रचार नहीं कर सकता है।
मोदी की इस हरकत को आचार संहिता का उल्लंघन माना जा रहा है।
सपा के निशाने पर
मोदी काफी पहले से ही सपा के निशाने पर हैं। सपा सु्प्रीमो मुलायम सिंह यादव और मोदी का वाकयुद्घ तब और जोर पकड़ गया जब मोदी ने एक रैली के दौरान मुलायम पर तंज कसते हुए कहा था कि 'नेताजी यूपी को गुजरात बनाने के लिए 56 इंच का सीना होना चाहिए।'
जिस पर मूलायम ने अब तक कई बार पलटवार किया है, वहीं उनके पुत्र और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने भी मोदी पर पलटवार करते हुए कहा था कि विकास करवाने के लिए 56 इंच का सीना नहीं बल्कि दिल बड़ा होना चाहिए।
मोदी का '56 इंच का जुमला' तब से राजनीतिक सुर्खियों में है, जब कब राजनेता इस पर बयान देते रहते हैं।