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अखिलेश ने मुलायम के चहेतों को भी नहीं बख्शा!

Wed, 29 Oct 2014 05:39 PM IST
राजेंद्र सिंह/अमर उजाला, लखनऊ
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दर्जा प्राप्त मंत्रियों को हटाने में सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव और मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के चहेते और नजदीकी समझे वाले नेता भी भेंट चढ़ गए हैं। यूं तो सपा में सभी नेतृत्व के नजदीकियों का दावा करते हैं लेकिन कुछ ऐसे भी हैं जो संघर्षों के दौर के भरोसेमंद साथी रहे हैं या जिनसे उनके पारिवारिक रिश्ते हैं, ऐसे लोगों की लालबत्ती भी छिन गई है।
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भले ही उन्हें बाद में दूसरी जिम्मेदारियां दी जाएं लेकिन अभी वे उन 92 लोगों की सूची में शामिल हो गए हैं जिन्हें सरकार ने बर्खास्त कर दिया है।

सपा सरकार ने सौ से ज्यादा नेताओं को राज्यमंत्री का दर्जा देकर लालबत्ती से नवाजा था। इनमें से बहुत सारे लोगों के खिलाफ शिकायतें मिल रही थीं। कुछ रौब गालिब करने के लिए एस्कॉर्ट न मिलने पर तेवर दिखा रहे थे तो कुछ सत्ता के सुरूर में दबंगई में लगे थे।

लोकसभा चुनाव के हुई समीक्षा बैठकों में अध्यक्षों, विधायकों और प्रत्याशियों ने कई दर्जाधारी मंत्रियों पर पार्टी उम्मीदवारों के खिलाफ काम करने का आरोप लगाया था।
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ये माने जाते थे नजदीकी

राजकिशोर मिश्र: मुलायम सिंह यादव के शुरुआती दौर के साथी। पारिवारिक रिश्ते। लंबे समय तक सपा के कोषाध्यक्ष रहे। भारतेंदु नाट्य अकादमी के अध्यक्ष बनाए गए थे।

सुखराम यादव: स्व. हरिमोहन सिंह यादव के पुत्र। सुखराम और मुलायम परिवार के प्रगाढ़ रिश्ते रहे हैं। उनके हर सुख-दुख में सहभागी रहे। सुखराम को पिछड़ा वर्ग वित्त एवं विकास निगम का अध्यक्ष बनाया गया था।

मधुकर जेटली: मुलायम सिंह के पुराने साथी। सपा सरकार बनने के बाद से अखिलेश यादव के नजदीकी, वाह्य सहायतित परियोजनाओं का काम देख रहे थे।

नावेद सिद्दीकी: रेडियो जॉकी का काम छोड़कर अखिलेश यादव के कहने पर सपा से जुड़े। विधानसभा और लोकसभा चुनाव में सपा के पक्ष में काम किया। संगीत नाटक अकादमी के सभापति की जिम्मेदारी सौंपी गई थी।

सुनील यादव साजन : अखिलेश यादव की यूथ टीम के भरोसेमंद सहयोगियों में रहे। वर्ष 2012 के चुनाव से पहले बसपा सरकार के खिलाफ संघर्षों में आगे रहे। दुग्ध विकास विभाग के सलाहकार का काम देख रहे थे।

इन पर भी गिरी गाज

जयशंकर पांडेय: पुराने समाजवादी, मुलायम सिंह के पुराने और विश्वस्त सहयोगी, उनके सामने बेबाकी से बात रखने वाले। पशुधन विभाग के सलाहकार बनाए गए थे।

सीपी राय: सपा के पूर्व प्रदेश महासचिव। मुलायम सिंह के साथ ही अखिलेश यादव के भी नजदीकी। पार्टी प्रवक्ता की भूमिका में भी रहे। मद्य निषेध विभाग के सलाहकार की भूमिका में थे।

राजपाल कश्यप: लखनऊ विश्वविद्यालय छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष। सपा के संघर्ष के दौर में अग्रणी भूमिका में रहे। अखिलेश, मुलायम सिंह के नजदीकी। मत्स्य विकास निगम के अध्यक्ष बनाए गए थे।

आशु मलिक: मुजफ्फरनगर दंगों के बाद मुस्लिमों में सपा की इमेज बिल्डिंग और सामाजिक सद्भाव के लिए सक्रिय रहे। तमाम धार्मिक नेताओं से मुलायम-अखिलेश की मुलाकात में अहम भूमिका निभाई। युवा कल्याण परिषद के उपाध्यक्ष बनाए गए थे।
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कई नेताओं के लिए तय हो रही नई भूमिका

ऐसी चर्चा है कि सपा के वफादार और वजनी नेताओं को जल्दी ही आम से खास बनाया जाएगा। कई लोगों को सपा और अन्य फ्रंटल संगठनों के प्रदेश संगठन में समायोजित किया जाएगा। कई नेताओं को सरकार में विशेष दर्जा दिया जाएगा। यह स्क्रीनिंग हो रही है कि किन नेताओं का स्टेटस बढ़ाया जाए और किन्हें किनारे किया जाएगा।

यह भी कहा जा रहा है कि जिम्मेदारी देते वक्त सरकारी की छवि निखारने और पार्टी का जनाधार बढ़ाने का लक्ष्य सामने रखा जाएगा। जातीय समीकरणों को भी साधने पर पूरा जोर रहेगा।

मंत्रिमंडल में भी हो सकता है फेरबदल
दर्जाधारी मंत्रियों को हटाने के बाद अटकलें मंत्रिमंडल में फेरबदल की भी हैं। दरअसल, ज्यादातर दर्जा प्राप्त मंत्रियों के अपने जिलों के मंत्रियों से अच्छे संबंध नहीं रहे। वे अलग-अलग गुटों में बंटे रहे। जिस तरह दर्जाधारी मंत्रियों को लेकर तमाम शिकायतें मिली थीं, उसी तरह कुछ मंत्रियों के खिलाफ भी शिकायतें हैं।

सपा मुखिया कई बार इसका उल्लेख कर चुके हैं। राष्ट्रीय अधिवेशन तक में उन्होंने मंत्रियों को कड़ी नसीहत दी थी। दर्जा प्राप्त नेताओं को उनके पदों से हटाने के बाद मंत्रिमंडल में बदलाव की संभावना बढ़ गई है।
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