भले ही कानपुर में मोदी गरीबी की अलग परिभाषा दे गए, लेकिन सपा सरकार ने प्रदेश के गरीबों के वोट अपने पाले में खींचने की पूरी तैयारी कर ली है।
गरीब अपने बच्चों का भलीभांति पालन-पोषण कर सकें, इसके लिए सरकार उन्हें आर्थिक मदद देगी। एक बच्चे के लिए प्रतिमाह 500 रुपए और अधिकतम दो बच्चों के लिए एक हजार रुपए दिए जाएंगे।
पहले चरण में यह योजना बालगृह, आश्रम व बालिका निकेतन में रह रहे बच्चों को घर भेजने के लिए लागू की जाएगी। दूसरे चरण में गांवों के बीपीएल परिवार इस स्कीम में शामिल किए जाएंगे।
इंटीग्रेटेड चाइल्ड प्रोटेक्शन स्कीम (आईसीपीएस) के तहत यह प्रस्ताव महिला कल्याण विभाग ने तैयार किया है। योजना को जल्द ही सरकार हरी झंडी दिखाने की तैयारी में है।
योजना के तहत बालगृह व बालिका निकेतन में रह रहे गरीब परिवारों के बच्चों को उनके घर भेजने के लिए मदद दी जाएगी। यह मदद तीन साल तक लगातार दी जाएगी।
इसमें उन बच्चों को शामिल किया जाएगा जो बालश्रम में पकड़े जाने के कारण बालगृहों में रह रहे हैं। कई बच्चे घरों से भागकर आ जाते हैं। इन बच्चों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए यह योजना बनाई गई है।
कई परिवार की माली हालत खराब होने के कारण बच्चों को बालगृहों से वापस नहीं ले जाते हैं। इसलिए सरकार ऐसे परिवारों को मदद देगी। सरकार का मानना है कि इससे बच्चों की अच्छे तरीके से देखभाल हो सकेगी।
इसके लिए नियम व शर्तें तैयार की जा रही हैं। जिला स्तर पर पालन-पोषण देखभाल समितियां इस योजना पर नजर रखेंगी।
जिलेवार तय होगा लक्ष्य
इस योजना के लिए सरकार जिलेवार लक्ष्य तय करेगी। इसी के अनुसार बजट आवंटित कर योजना शुरू की जाएगी। नियम-शर्तें तय होने के बाद आवेदन पत्र मांगे जाएंगे। आने वाले आवेदन पालन पोषण देखभाल समितियों के सामने रखे जाएंगे। समितियां लक्ष्य के अनुसार लाभार्थियों का चयन करेंगी।
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