मुसीबत यहीं नहीं खत्म हुई, बुजुर्ग की मौत के बाद शव वाहन भी नहीं मिला। रामनगरी अयोध्या में भी अस्पताल भगवान भरोसे हैं। अयोध्या में विशेषज्ञ चिकित्सक न होने से दिल के मरीजों का इलाज बाधित है। गोरखपुर का बीबीडी अस्पताल भी असुविधाओं का शिकार है। बेहतरीन इलाज की उम्मीद में प्रयागराज निवासी बलराम यादव अपने किडनी रोग से पीड़ित 12 वर्ष के बच्चे को लेकर केजीएमयू आया। लेकिन उसे लोहिया संस्थान भेज दिया गया।
वहां भी इलाज नहीं मिला तो पीजीआई की ओपीडी में दिखाया, जहां डाक्टरों ने इलाज में मोटी रकम खर्च होने की बात कही तो निराश पिता प्रयागराज लौट गया। सस्ता और गुणवत्तापूर्ण इलाज का सपना प्रदेश में सपना ही रह गया है। सरकारी अस्पतालों में बेड वेंटिलेटर का खेल चल रहा है। गरीब सड़क पर मरने को विवश हैं।