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घोषित सपा उम्मीदवारों का हो रहा है जबरदस्त विरोध, हो सकते हैं बदलाव

Fri, 08 Apr 2016 02:27 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
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विधानसभा चुनाव 2017 के लिए सपा के प्रत्याशियों का विरोध थम नहीं रहा है। जिलों से लेकर सपा दफ्तर तक विरोध के स्वर सुने जा रहे हैं। इसे देखते हुए 144 घोषित प्रत्याशियों में बड़े बदलाव के संकेत मिल रहे हैं। सपा नेतृत्व 40 से 50 तक उम्मीदवार बदल सकता है।
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वरिष्ठ मंत्री और सपा के प्रमुख प्रवक्ता शिवपाल सिंह यादव ने 25 मार्च को 143 प्रत्याशियों की पहली सूची जारी की थी। इसी दिन दो प्रत्याशी बदल दिए गए थे।

सहारनपुर की रामपुर मनिहारन सीट पर तो नया प्रत्याशी घोषित कर दिया था लेकिन मुजफ्फरनगर की मीरापुर सीट पर शाहनवाज राणा का टिकट बदलकर नए प्रत्याशी की घोषणा रोक दी गई थी।
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दो दिन बाद सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव की छोटी बहू अपर्णा यादव को लखनऊ कैंट से उम्मीदवार घोषित किया गया। 6 अप्रैल को सपा ने दो नए प्रत्याशी घोषित किए और चार प्रत्याशी बदल दिए।

जिन चार सीटों पर प्रत्याशी बदले हैं, उनमें एक पर उम्मीदवार की घोषणा बाद में की जाएगी। इस तरह सपा ने 2012 की हारी हुई सीटों पर कुल 144 प्रत्याशी घोषित किए हैं।

इस तरह की आ रही हैं शिकायतें

अधिकतर जिलों में सपा के उम्मीदवारों का विरोध हो रहा है। कहीं टिकट देते वक्त पार्टी के प्रति निष्ठा का ध्यान न रखने का आरोप है तो कहीं जिताऊ दावेदारों की अनदेखी की शिकायतें हैं।

कई सीटों पर ऐसे नेताओं को उम्मीदवार बना दिया गया जिनके खिलाफ जिला पंचायत चुनाव में कार्रवाई हुई थी। पिछली बार चुनाव लड़ने वाले कुछ दावेदारों का टिकट कटने से भी नाराजगी है।

कुछ जगह सपा के वरिष्ठ नेता और कई मंत्री अपने जिलों में समीकरण के मुताबिक टिकट न मिलने से नाखुश बताए जा रहे हैं।
वे सपा मुखिया, मुख्यमंत्री, रामगोपाल यादव और शिवपाल सिंह यादव तक अपनी बात पहुंचा रहे हैं। पार्टी सूत्रों का कहना है मुख्यमंत्री अखिलेश यादव भी कई सीटों पर उम्मीदवारों में बदलाव के पक्षधर हैं।

उन्हें टिकटों को लेकर लगातार फीडबैक मिल रहा है। उनके विदेश दौरे से लौटने के बाद प्रत्याशियों में बड़े फेरबदल पर चर्चा हो सकती है।

कहीं फुंक रहे पुतले, कहीं विरोध में नारे

वाराणसी में शिवपुर सीट से प्रत्याशी बनाए अरविंद मौर्य के पुतले फूंके जा चुके हैं। वहां सपा में  गुटबंदी मुखर है। युवा नेता आशुतोष सिन्हा सपा मुखिया के सामने वाराणसी शहर, कैंट, उत्तर और दक्षिण सीटों पर घोषित प्रत्याशियों पर पुनर्विचार का आग्रह कर चुके हैं। कई और जिलों में भी उम्मीदवारों का मुखर विरोध हो चुका है।

नेतृत्व को लिखित में दे रहे अपना पक्ष
सपा मुख्यालय पर बृहस्पतिवार को बागपत के सपा जिला उपाध्यक्ष मास्टर सौधान सिंह के साथ कई लोग दिन भर डटे रहे। सौधान छपरौली से टिकट के दावेदार थे। यहां से तराबुदुद्दीन को उम्मीदवार बनाया गया है।

सौधान का कहना है कि वह पार्टी के संस्थापक सदस्य हैं। पहले भी दो बार टिकट मांग चुके हैं। चार साल से वह क्षेत्र में सक्रिय हैं लेकिन टिकट तराबुद्दीन को दे दिया। इसका क्षेत्र में विरोध है। सौधान जैसे तमाम नेता सपा के प्रदेश सचिव एसआरएस यादव क ोअपनी पीड़ा सुना रहे हैं। पार्टी नेतृत्व तक पहुंचाने के लिए अपना पक्ष लिखकर दे रहे हैं।
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सबसे ज्यादा कामयाबी पूर्वांचल की सीटों पर मिली

हारी हुई सीटों पर प्रत्यशियों की घोषणा के बाद सपा मुख्यालय पर भीड़भाड़ बढ़ गई है। टिकट के दावेदारों और नाराजगी जताने वालों में पूर्वांचल के लोग ज्यादा दिख रहे हैं।

सपा को 2012 में सबसे ज्यादा कामयाबी पूर्वांचल में ही मिली थी। बुंदेलखंड व पश्चिमी यूपी के दावेदार भी सक्रिय हैं।

अमेठी, फतेहपुर, सहारनपुर, आगरा, बागपत, बुलंदशहर, वाराणसी, इलाहाबाद, गोरखपुर समेत कई जिलों के नेता  बृहस्पतिवार को सपा मुख्यालय पर दिखे।
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