विधानमंडल में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की भाषा को असंसदीय व अशोभनीय बताते हुए बृहस्पतिवार को विपक्षी दलों ने दोनों सदनों में विरोध जताया। विपक्षी सदस्यों ने दोनों सदनों की कार्यवाही में काली पट्टी बांधकर हिस्सा लिया।
उन्होंने सांप-नेवले जैसे शब्दों को सदन व मुख्यमंत्री की गरिमा के अनुरूप बताते हुए कार्यवाही से निकालने की मांग की। कहा कि लोकसभा व राज्यसभा कई बार अशोभनीय व असंसदीय शब्दों को कार्यवाही से निकाल चुकी है।
इस विषय में विधानसभा अध्यक्ष ह्रदय नारायण दीक्षित ने अपना फैसला सुरक्षित कर लिया है। वह दलीय नेताओं से वार्ता के बाद अपना निर्णय सुनाएंगे।
विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष रामगोविंद चौधरी ने सदन की कार्यवाही प्रारंभ होते ही इस मुद्दे को उठाया। कहा कि गाली-गलौज की भाषा सदन की गरिमा के अनुरूप नहीं है। सांप-नेवले से नेताओं या दलों की तुलना करना संसदीय नहीं है।
उन्होंने इन शब्दों को कार्यवाही से निकालने की मांग उठाई। बसपा के लालजी वर्मा ने कहा नियमों का हवाला देते हुए कहा कि अनुपूरक अनुदानों पर वाद-विवाद इसकी मदों तक सीमित रहना चाहिए। इसके बावजूद मुख्यमंत्री का भाषण हुआ।
उन्होंने असंसदीय भाषा का प्रयोग किया। किसी की तुलना जानवर से करना असंसदीय है। उन्होंने कहा कि सदन की गरिमा को ध्यान में रखते असंसदीय शब्दों को कार्यवाही से हटा दिया जाए।
कांग्रेस के अजय कुमार लल्लू ने कहा कि जिस तरह की भाषा का प्रयोग किया गया वह मुख्यमंत्री की गरिमा को शोभा नहीं देता। सड़कों की भाषा सदन में नहीं आनी चाहिए।
संसदीय कार्यमंत्री सुरेश खन्ना ने कहा कि मुख्यमंत्री का भाषण सभी ने सुना है।
उन्होंने असंसदीय शब्दों का प्रयोग नहीं किया। विपक्षी दलों से कहा कि वर्षों वे सत्ता में रहे हैं। उनके समय कैसे-कैसे उदाहरण दिए जाते थे। उनकी भाषा शालीन नहीं थी। मुख्यमंत्री के भाषण में किसी व्यक्ति को लेकर आक्षेप नहीं था। सपा के पारसनाथ यादव ने कहा कि यह मामूली मामला नहीं है।
मुख्यमंत्री को त्याग और बलिदान से पद मिला है, उनकी बातें अनुभव हीनता का नतीजा हैं। उनकी बात पर मंत्री सुरेश राणा समेत सपा के कई सदस्यों ने आपत्ति जताई। विधानसभा अध्यक्ष ह्रदय नारायण दीक्षित वे कहा कि वह इस विषय में प्रतिपक्ष के नेताओं व संसदीय कार्यमंत्री से बात करेंगे। कहा, मै अपना फैसला सुरक्षित रखा हूं।
सीएम योगी आदित्यनाथ ‘सांप’ वाले बयान पर विधान परिषद खूब हंगामा हुआ। सपा, बसपा और कांग्रेस के सदस्य काली पट्टी बांधकर सदन में पहुंचे। प्रश्न प्रहर के बाद उन्होंने इस मुद्दे पर चर्चा करवानी चाही, जिसकी उन्हें अनुमति नहीं मिली। इसके बाद वे सीएम पर अशोभनीय व्यवहार का आरोप लगाते हुए नारेबाजी करने लगे।
अधिष्ठाता यज्ञदत्त शर्मा को तीन बार सदन की कार्रवाई स्थगित करनी पड़ी। नेता प्रतिपक्ष अहमद हसन ने कहा कि सीएम ने विपक्ष के लिए अशोभनीय भाषा का प्रयोग किया। लोकतंत्र में इससे पहले ऐसे उदाहरण विरले ही देखने को मिलेंगे।
सपा सदस्य राजेश यादव और आनंद भदौरिया ने कहा कि सीएम को दलित और पिछड़े सांप-छंछूदर ही दिखते हैं। विपक्षी सदस्यों ने इसे अपमान बताते हुए सदन में चर्चा की मांग की। अधिष्ठाता यज्ञदत्त शर्मा ने कहा कि सीएम ने यह बयान विधानसभा में दिया है, इसलिए इस पर चर्चा वहीं होनी चाहिए।
विधान परिषद में चर्चा का कोई औचित्य नहीं हैं। सपा के सदस्य नरेश उत्तम पटेल ने कहा कि सीएम विधान परिषद के सदस्य हैं। इसलिए यहां भी चर्चा हो सकती है। सुनील कुमार साजन ने कहा कि सड़क से सदन तक हम गलत को गलत कहने से पीछे नहीं हटेंगे।
नेता सदन डॉ. दिनेश शर्मा ने अधिष्ठाता से पूछा कि प्रतिपक्ष बिना किसी नियम के तहत अपनी बात रखने पर आमादा है। यह उचित नहीं है। डॉ. शर्मा ने कहा कि विपक्ष के पास सदन में उठाने के लिए सकारात्मक मुद्दे नहीं हैं। इसलिए विवाद उत्पन्न करके बहिष्कार करना चाहते हैं।
इस पर विपक्षी सदस्य खड़े होकर जोर-जोर से सरकार विरोधी नारे लगाने लगे। अधिष्ठाता ने करीब 12:35 बजे पहले 10 मिनट के लिए, फिर एक बजे तक के लिए और उसके बाद पुन: 15 मिनट के लिए सदन की कार्रवाई स्थगित की।