सपा चाहती है कि बसपा से हर हाल में गठबंधन हो। दूसरे दलों को भी इसका हिस्सा बनाने से सपा को परहेज नहीं है। गोरखपुर व फूलपुर में जीत के बाद सपा ने राज्यसभा की एक सीट पर बसपा के डॉ. भीमराव अंबेडकर का समर्थन किया, हालांकि वह चुनाव नहीं जीत पाए। इसके बदले सपा ने विधान परिषद चुनाव की दो में से एक सीट बसपा को दी।
कर्नाटक में सीएम एचडी कुमार स्वामी के शपथ ग्रहण समारोह में भी अखिलेश यादव और मायावती के बीच बातचीत हुई है। सपा के राष्ट्रीय सचिव राजेंद्र चौधरी कहते हैं कि गठबंधन वक्त की जरूरत है। सपा समान विचार वाले दलों के साथ गठबंधन की पक्षधर है। सपा-बसपा दोस्ती से इसकी पहल हो चुकी है। कैराना व नूरपुर उपचुनाव भी गठबंधन बनाकर लड़े जा रहे हैं।
रविवार को एक सवाल के जवाब में अखिलेश यादव भी कह चुके हैं कि बसपा के साथ उनके दल का गठबंधन होगा। उन्होंने यह भी जोड़ा कि समाजवादी सभी को सम्मान देना जानते हैं। यानी, उन्होंने संकेत दिया कि बसपा सुप्रीमो मायावती के सम्मान का ध्यान रखा जाएगा।
राहुल गांधी व अखिलेश यादव।
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2017 के विधानसभा चुनाव में सपा ने कांग्रेस से गठबंधन किया था। दोनों दलों के बीच क्रमश: 298 व 105 सीटों पर चुनाव लड़ने की सहमति बनी, लेकिन मतदान के आखिरी चरण तक भी गठबंधन की गांठ पूरी तरह खुल नहीं पाई थी। एक दर्जन सीटों पर दोनों दल आमने-सामने रहे।
सपा-कांग्रेस ने ‘यूपी को ये साथ पसंद है’ नारा देकर चुनाव लड़ा, लेकिन जनता ने राहुल व अखिलेश की दोस्ती पर मुहर नहीं लगाई। ऐसे में 2019 के लिए विपक्षी दलों के गठबंधन के बीच सीटों का बंटवारा बड़ी चुनौती रहेगी।