रायबरेली। जीवनदायिनी निर्मल गंगा किनारे लकड़ी से कोयला बनाने की धधक रहीं भट्ठियां स्थानीय लोगों की सांसों में जहर घोल रही हैं। इनसे उठने वाले धुएं का असर आसपास के क्षेत्रों में भी पड़ रहा है। सफेद कपड़े काले पड़ जा रहे हैं। खांसी आने पर काले रंग का बलगम तक निकल रहा है।
वन विभाग का दावा है कि जिले में 65 कोयला भट्ठियों के लाइसेंस जारी किए गए हैं। इसके इतर 120 भट्ठियों का संचालन हो रहा है। डलमऊ कोतवाली से चंद कदम दूरी पर भी अवैध भट्ठियों का संचालन हो रहा है। डलमऊ क्षेत्र में अभी गंगा किनारे 45 से ज्यादा भट्ठियां हैं।
इनमें चांदपुर लूक गांव में ही अकेले 35 भट्ठियां चल रही हैं। कोतवाली क्षेत्र के महुआहार, जमनीपुर, कुंजन का पुरवा, भीमगंज में भी कोयला भट्ठियां हैं। इनमें से बस 10 भट्ठियों का ही लाइसेंस है। शेष अवैध तरीके से संचालित की जा रही हैं। इस कारण इन क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 120 से 130 तक पहुंच गया है।
जिला अस्पताल में पहुंचने वाले अधिकतर श्वास रोगी चांदपुर लूक गांव के होते हैं। बुधवार को भी इलाज कराने यहां से पहुंचे प्रविंद्र की हालत जांच में गंभीर मिली। चिकित्सकों के अनुसार धुएं से उनके फेफडे़ कमजोर हो गए हैं। समय पर इलाज नहीं मिलता तो जान पर बन आती।
जिला अस्पताल के मेडिसिन विभाग के डॉ. गौरव त्रिवेदी बताते हैं कि सांस के साथ फेफड़ों में जाकर भट्ठियों का धुआं श्वास रोगी बनाता है। फेफड़े भी कमजोर होते हैं। ठंड में बच्चों और बजुर्गों के लिए यह धुआं घातक है।
शिकायत करते हैं...सुनवाई नहीं होती
भीमगंज की शकुंतला ने बताया कि सुबह घर में झाड़ू लगाने पर कालिख निकलती है। सफेद कपड़े धुलकर बाहर सुखाने पर काले पड़ जाते हैं। बड़ा बुरा हाल है। अवैध भट्ठियों की शिकायत पर कोई सुनने वाला नहीं है। जमनीपुर निवासी सुंदर बताते हैं कि लकड़ियों के टुकड़े और गोबर के कंडों को कोयला भट्ठियों में जलाया जाता है। सात दिन तक लगातार भट्ठी जलती है। इस दौरान इनसे बड़ी मात्रा में धुआं निकलता है।
गठित की है टीम, ध्वस्त की जाएंगी भट्ठियां : एसडीएम
एसडीएम डलमऊ अभिषेक वर्मा ने बताया कि गंगा किनारे अवैध तरीके से कोयला भट्ठियों के संचालन की शिकायत मिली है। एक टीम गठित की गई है। इसमें वन विभाग के कर्मियों को भी शामिल किया गया है। जल्द अवैध तरीके से संचालित इन कोयला भट्ठियों को बुलडोजर से ध्वस्त किया जाएगा।