इन फैसलों पर कई बार आपत्तियां उठीं, पर अधिकारियों ने बच निकलने का कोई न कोई तरीका निकाल ही लिया। इसमें सरकार में अहम पदों पर बैठे लोगों का संरक्षण भी किसी से छिपा नहीं है।
वन विभाग के एक सेवानिवृत्त विभागाध्यक्ष ने नाम न छापने के अनुरोध के साथ कहा कि अमर उजाला में सोनभद्र के जमीन घोटाले से संबंधित प्रकाशित हो रहे समाचार काफी गंभीर किस्म के हैं। संबंधित फाइल शासन में हैं। अगर इन्हें ठीक से चेक कर लिया जाए तो हकीकत सामने आते देर नहीं लगेगी। यह भी सामने आ जाएगा कि किस तरह से सोनभद्र में वन भूमि की गैर आदिवासियों ने लूट मचाई है।
बता दें कि, 29 दिसंबर 2014 को उच्चाधिकारियों को भेजे अपने पत्र में तत्कालीन मुख्य वन संरक्षक एके जैन ने भी लिखा था, ‘पूर्व में सोनभद्र में 25 हजार हेक्टेयर भूमि को भारतीय वन अधिनियम के प्रावधानों के विरुद्ध वन क्षेत्र से अलग कर गैर आदिवासियों तथा अन्य संस्थाओं के पक्ष में करने का अनुमान लगाया गया था। वर्तमान में प्राप्त जानकारी के अनुसार, जनपद सोनभद्र में यह आंकड़ा एक लाख हेक्टेयर का है और लगातार बढ़ता जा रहा है, जोकि गंभीर चिंता का विषय है।’