भगवान सिंह अधिकारी को अपनी समस्या बताते हुए भावुक हुए
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लखनऊ में एलडीए ने जन सामान्य और आवंटियों की समस्याओं के निस्तारण के लिए बृहस्पतिवार को कमेटी हॉल में प्राधिकरण दिवस/जनता अदालत का आयोजन किया। इस मौके पर 58 शिकायतें आईं, जिसमें से 12 का मौके पर ही निस्तारण किया गया। एलडीए वीसी डॉ. इंद्रमणि त्रिपाठी ने निर्देश दिए कि संवेदनशील प्रकरणों के निस्तारण के लिए संबंधित विशेष कार्याधिकारी खुद मौके पर जाकर जांच करेंगे।
वहीं, जसवंत सिंह सुयाल (78) को साथ लेकर उनके बेटे भगवान सिंह सुयाल व मामा जनता अदालत में पहुंचे। भगवान सिंह संपत्ति एवं रजिस्ट्री सेक्शन के अधिकारी और बाबुओं की कारस्तानी सुनाते-सुनाते भावुक हो गए। एलडीए वीसी से कहा कि साहब! क्या जब पापा मर जाएंगे, तब होगी रजिस्ट्री।
फरियादी की बात सुनकर उपाध्यक्ष भौचक्के रह गए। उपाध्यक्ष ने संबंधित ओएसडी, अपर सचिव व अधिशासी अभियंता की संयुक्त टीम गठित करते हुए तत्काल रजिस्ट्री कराने के निर्देश दिए। दरअसल, जसवंत हजरतगंज की मलिन बस्ती में रहते हैं, उनका कभी 3500 वर्गफीट भूखंड के बीच में छोटा सा मकान था।
एलडीए ने गोमतीनगर विस्तार योजना में इनके भूखंड व घर का अधिग्रहण कर लिया। उसके एवज में उन्हें 1250 वर्गफीट का भूखंड दिया। इसकी रजिस्ट्री के लिए जसवंत सिंह ने साल 2017 में 1.62 लाख रुपये एलडीए के खजाने में जमा कराए। पांच साल से भूखंड की रजिस्ट्री के लिए एलडीए की दौड़ लगाते रहे। खुद बीमार पड़े तो बेटा भगवान दो साल से रजिस्ट्री कराने के लिए दौड़भाग कर रहा था।