लखनऊ। जब घर में लक्ष्मी का आगमन होता है तो दुखों की विदाई खुद-ब-खुद होने लगती है। ऐसा ही बदलाव देखने को मिला है उन परिवारों में, जिनके सदस्य एक साल पहले प्रदेश सरकार और सेवायोजन विभाग के सहयोग से इस्राइल नौकरी करने गए थे।
किसी ने कर्ज उतारा, किसी ने मां का इलाज कराया, किसी ने बेटी को अच्छे स्कूल में दाखिला दिलाया, तो कोई पक्का घर बनवा रहा है। सीमित संसाधनों, सामाजिक दबाव और आर्थिक तंगी से जूझते ये परिवार अब राहत की सांस ले रहे हैं।
Iघर चलाने के लिए कर्ज पर निर्भर थे। अब हर महीने 1 लाख की बचत हो रही है। छह लाख रुपये का कर्ज चुका दिया है।I
I
- राकेश कुमार, मऊI
I
I
Iमां को पैरालिसिस था, इलाज नहीं करवा पा रहे थे। इस्राइल आने के बाद बेहतर इलाज संभव हो पाया है। विदेश जाना जरूरी कदम था।I
I- अक्षय कुमार, लखनऊI
I
I
Iबेटी को शहर के नामी स्कूल में दाखिला दिलाया। पापा घर बनवा रहे हैं, पत्नी के लिए स्कूटी ली है। लौटकर स्टार्टअप शुरू करूंगा।I
I- डब्बू चौहान, मऊI
I
I
Iसरकार का अगला लक्ष्य – 30 हजार को विदेश भेजनाI
Iइस्राइल से श्रमिकों का फीडबैक सकारात्मक है। अभी 5,000 श्रमिक वहां कार्यरत हैं। अगले चरण में 30,000 युवाओं को विदेश में रोजगार दिलाने की योजना पर काम चल रहा है। मिशन रोजगार के तहत यह बड़ा कदम साबित हो सकता है।I
I-सूर्यकांत सिंह, संयुक्त निदेशक ,सेवायोजनI
राकेश कुमार।
राकेश कुमार।