अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (एएमयू) की लाइब्रेरी में लड़कियों के प्रवेश को लेकर कथित तौर पर विवादित बयान देने वाले कुलपति (वीसी) जमीरउद्दीन शाह चौतरफा घिर गए हैं।
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मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति ईरानी ने बयान पर कड़ी नाराजगी जताते हुए इसे ‘बेटियों का अपमान’ करार दिया है।
मंत्रालय ने कुलपति से जवाब मांगने के साथ-साथ उच्च शिक्षा सचिव से भी रिपोर्ट मांगी है। अल्पसंख्यक मामलों की मंत्री नजमा हेपतुल्ला समेत कई नेताओं ने भी इस बयान की कड़ी निंदा की है।
स्मृति ने नाराजगी जताते हुए कहा कि जब पूरा देश राष्ट्रीय शिक्षा दिवस मना रहा है, उस वक्त ऐसा बयान आना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।
महिला होने के नाते इस तरह की टिप्पणी दुख पहुंचाती है। मैंने उच्च शिक्षा मामलों के सचिव को इस मामले में रिपोर्ट देने के लिए कहा है।’
नजमा और मुख्तार अब्बस नकवी भी नाराज
अल्पसंख्यक मामलों की मंत्री नजमा हेपतुल्ला ने बयान की आलोचना करते हुए कहा कि लड़कियों को ही लाइब्रेरी का इस्तेमाल करने से रोका जा रहा है।
अगर जगह छोटी है तो इसे बड़ा भी किया जा सकता है। उन्होंने कहा, ‘यह बयान ऐसे समय में आया है, जब मौलाना आजाद की जयंती मनाई जा रही है। 62 साल पहले आजाद ने लड़कियों की शिक्षा पर जोर दिया था।’
इसी मंत्रालय में केंद्रीय राज्य मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा है कि इस तरह के बयान सभ्य समाज में स्वीकार योग्य नहीं हैं।
राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष ललिता कुमारमंगलम ने हैरानी जताते हुए कहा, ‘क्या किसी छात्र को लिंग के आधार पर लाइब्रेरी में जाने से रोकना गैर कानूनी नहीं है?’
कुलपति लेफ्टिनेंट जनरल जमीरउद्दीन शाह ने कथित तौर पर कहा था कि अगर मौलाना आजाद लाइब्रेरी में लड़कियों को प्रवेश करने की इजाजत दी तो लाइब्रेरी में लड़कों की संख्या चार गुना तक बढ़ जाएगी।
मंगलवार को एक निजी यूनिवर्सिटी के दीक्षांत समारोह में शिरकत करने लखनऊ आए शाह ने राज्यपाल के सामने अपना पक्ष भी रखा।
कुलपति बोले, बदनाम करने की साजिश
अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) के कुलपति ले. जनरल जमीर
उद्दीन शाह ने छात्राओं को लाइब्रेरी के इस्तेमाल की इजाजत नहीं देने को
लेकर मंगलवार को सफाई दी। उन्होंने कहा- मौलाना आजाद लाइब्रेरी में जगह कम
है इसलिए स्नातक की छात्राओं को इसके इस्तेमाल की इजाजत नहीं दी।
मेरे
इस कदम को महिला विरोधी तरीके से पेश किया गया। जबकि स्नातक को छोड़कर
बाकी सभी पाठ्यक्रमों की करीब पांच हजार छात्राएं इस लाइब्रेरी का इस्तेमाल
कर रही हैं। अलीगढ़ के अब्दुल्ला वीमेंस कॉलेज की छात्राओं
ने सोमवार को एएमयू की मौलाना आजाद लाइब्रेरी इस्तेमाल करने की इजाजत
कुलपति से मांगी थी, लेकिन उन्होंने इन्कार दिया था। इसको लेकर विवाद खड़ा
हो गया।
लखनऊ में मंगलवार को पत्रकारों से बातचीत में ले. जनरल जमीर
उद्दीन शाह ने कहा-परास्नातक, रिसर्च, डिप्लोमा, इंजीनियरिंग, मेडिकल सहित
अन्य पाठ्यक्रमों की पांच हजार लड़कियां पहले से मौलाना आजाद लाइब्रेरी का
इस्तेमाल कर रही हैं।
लड़के जानते हैं अपनी तहजीब
कुलपति ने कहा कि जहां तक एएमयू के लड़कों की बात है तो वे अपनी
तहजीब जानते हैं। रोक केवल वीमेंस कॉलेज की छात्राओं के लिए है। इस कॉलेज
में पांच हजार छात्राएं पढ़ती हैं। यह कैम्पस एएमयू से तीन किलोमीटर दूर
है। यहां की अलग लाइब्रेरी है।
इसके अलावा मौलाना आजाद लाइब्रेरी से
जो भी किताबें चाहिए होती हैं इसके लिए इन्हें ऑनलाइन आवेदन करना होता है।
अगले दिन वह किताब छात्रा को मिल जाती है।
उन्होंने कहा कि एएमयू
पूरी तरह से सेक्युलर यूनिवर्सिटी है लेकिन इसे बदनाम करने की साजिश की जा
रही है। हम लोग छात्राओं को बराबरी का दर्जा देते हैं। छात्र-छात्राओं में
कोई भेदभाव नहीं किया जाता है। दोनों को एक समान सुविधाएं मुहैया कराई जाती
हैं।
पहले दिया था ये फरमान
इसके पहले कुलपति ने अपने बयान में कहा गया था कि एएमयू की सेंट्रल
लाइब्रेरी में लड़कियों को जाने की इजाजत नहीं दी सकती। इससे लड़कों का
ध्यान बंटता है।
वुमेंस कॉलेज की स्टूडेंट्स ने ये मांग की थी कि
उन्हें सेंट्रल लाइब्रेरी में पढ़ने की इजाजत दी जाए। इस मामले में लंबे
वक्त से बातचीत चल रही थी। वीसी ने ये कहते हुए उनकी ये मांग खारिज कर दी
कि लड़कियों के आने से चार गुना ज्यादा लड़के लाइब्रेरी पहुंचेंगे।
हालांकि वीसी की तरफ सफाई दी गई है कि सेंट्रल लाइब्रेरी में जगह की काफी कमी है। मुद्दा अनुशासन नहीं बल्कि जगह है।
कुलपति के इस बयान से स्टूडेंट्स में काफी रोष है। उनका कहना है कि
ऐसा नहीं है कि वहां इतने लड़के आते हैं कि जगह की कमी हो जाए। कम से कम
हमें वहां से बुक इश्यू करवाने की इजाजत तो मिलनी चाहिए।
वहीं यूनीवर्सिटी की एक और स्टूडेंट का कहना है कि लड़के-लड़कियां बराबर हैं, फिर हमसे हमारा हक क्यों छीना जा रहा है।
उधर
वीसी के पीआरओ डॉ. राहत अबरार का कहना है कि वुमेंस कॉलेज में एक समारोह
के दौरान सोमवार को ये मुद्दा उठा था। वीसी ने इस तरह का कोई बयान नहीं
दिया है। उन्होंने कहा था कि लाइब्रेरी में स्पेस न होने की वजह से दिक्कत
होगी।
हम कोशिश कर रहे हैं कि गर्ल्स स्टूडेंट की पढ़ाई प्रभावित न
हो। पीजी, रिसर्च वगैरह की करीब 10 हजार गर्ल्स स्टूडेंट हैं। जिनके लिए
अलग से बुक बैंक है। अगर उन्हें कोई बुक मिलने में दिक्कत आ रही है तो वे
लाइब्रेरियन को बता सकती हैं, 24 घंटे के अंदर वो बुक उनकी लाइब्रेरी में
उपलब्ध करा दी जाएगी।