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स्मोकिंग की तो नहीं बन पाएंगी मां

Wed, 13 Mar 2019 01:35 AM IST
ishwar ashish न्यूज डेस्क, अमर उजाला लखनऊ
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प्रतीकात्मक तस्वीर
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धूम्रपान केवल फेफड़ों को ही प्रभावित नहीं करता। यह लंग्स व चेस्ट इन्फेक्शन के साथ ही महिलाआें को गंभीर बीमारियां भी देता है। आजकल नई पीढ़ी की लड़कियों में सिगरेट और हुक्के का चलन काफी बढ़ रहा है। अगर लंबे समय तक किसी भी रूप में धूम्रपान किया जाए तो यह महिलाओं को हमेशा कि लिए बांझ बना सकता है। यही नहीं स्मोकिंग करने वाली महिलाओं को प्रीटर्म डिलीवरी (समय पूर्व प्रसव) और गर्भ में पल रहे शिशु का विकास भी रुक जाता है। जो जच्चा-बच्चा दोनों की जान के लिए खतरनाक होता है। यह बात क्वीनमेरी अस्पताल की स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ प्रो. सुजाता देव ने मंगलवार को नो स्मोकिंग डे की पूर्व संध्या पर कही। महिलाओं के लिए धूम्रपान के दुष्परिणामों की जानकारी देते हुए उन्होंने कहा कि ऐसी समस्याएं उन महिलाओं में होती हैं जो नियमित रूप से या अधिक स्मोकिंग करती हैं।

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हाइपरटेंशन का भी बढ़ता है खतरा : डॉ. सुजाता ने बताया कि गर्भावस्था के दौरान उच्च रक्तचाप या हाइपरटेंशन की समस्या सबसे ज्यादा खतरनाक होती है। हाइपरटेंशन पीड़ित गर्भवती की प्री-एक्लेम्सिया व एक्लेम्सिया की शिकायत हो जाती है जिससे जच्चा-बच्चा की जान को खतरा होता है। ऐसी महिलाएं जो स्मोकिंग करती हैं उनमें हाइपरटेंशन की समस्या बेहद आम होती है, ऐसे में गर्भावस्था के समय खतरा काफी बढ़ जाता है।

बडे़ शहरों की 40 प्रतिशत युवतियां करती हैं स्मोकिंग
एसोचैम सोशल डवलपमेंट फाउंडेशन की ओर से बीते साल किए गए शोध में पाया गया कि शहरी क्षेत्र की 40 प्रतिशत युवतियां नियमित रूप से सिगरेट पीती हैं। एसोचैम की ओर से 2018 में लखनऊ, चेन्नई, बेंगलूरू, पुणे, दिल्ली, हैदराबाद समेत 10 बड़े शहरों में 22 से 30 साल की उम्र की 2000 से अधिक युवतियों पर सर्वे किया गया था। इसमें 40 प्रतिशत युवतियों ने नियमित स्मोकिंग की बात स्वीकार की थी। वहीं 12 प्रतिशत युवतियों ने दिन में कुल 2-3 सिगरेट पीने की बात स्वीकार की थी। वहीं अन्य 46 प्रतिशत महिलाओं ने इंफर्टिलिटी और ब्रेस्ट कैंसर के डर से स्मोकिंग छोड़ने की बात कुबूल की थी।
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ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं में आज भी चलन
डॉ. सुजाता ने बताया कि आमतौर पर विदेशों के मुकाबले देश में चेन स्मोकर महिलाएं कम हैं। विदेशी महिलाआें में स्मोकिंग का चलन ज्यादा है। हालांकि हुक्का हो या सिगरेट देश में न्यू जेनरेशन का स्मोकिंग में रुझान काफी नजर आ रहा है। धूम्रपान का चलन ग्रामीण महिलाओं में अब भी पाया जा रहा है। उनमें अब भी बीड़ी, सिगरेट और हुक्के की आदत देखने को मिल जाती है।

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