यदि आप धूम्रपान करते हैं तो इससे आपके होने वाले बच्चे का वजन कम हो सकता है। साथ ही जन्मजात बीमारियां होने का भी खतरा बना रहता है। तंबाकू और धूम्रपान से हर साल देश में करीब 12 लाख लोगों की मौत हो जाती है। आगे पढ़ें और जानें पूरा अपडेट...
किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय में रेस्पिरेट्री मेडिसिन विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. सूर्यकांत के मुताबिक गर्भावस्था के दौरान परोक्ष या प्रत्यक्ष रूप से धूम्रपान करने से नवजात का वजन कम हो सकता है। इसके साथ ही शिशु को जन्मजात बीमारियां होने का खतरा भी होता है। डॉ. सूर्यकांत 31 मई को मनाए जाने वाले विश्व तंबाकू निषेध दिवस की पूर्व संध्या पर जानकारी दे रहे थे।
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डॉ. सूर्यकांत ने बताया कि तंबाकू और धूम्रपान से हर साल देश में करीब 12 लाख लोगों की मौत हो जाती है। इसके साथ ही 25 तरह की बीमारियां तथा 40 तरह के कैंसर हो सकते हैं। ब्रॉन्काइटिस, एसिडिटी, टीबी, हार्ट-अटैक, फॉलिज, नपुंसकता, माइग्रेन, सिरदर्द, बालों का जल्दी सफेद होना, रक्त संचरण प्रभावित होना, ब्लड प्रेशर की समस्या, सांस फूलना तथा नित्य क्रियाओं में अवरोध की समस्याएं भी तंबाकू की वजह से हो सकती हैं।
मिलाए जाते हैं लती बनाने वाले तत्व
डॉ. सूर्यकांत ने बताया कि इस साल की थीम- अपील का पर्दाफाश : तम्बाकू और निकोटीन उत्पादों पर उद्योगों की रणनीति को उजागर करना, है। इस साल इस दिवस के आयोजन का उद्देश्य उन हथकंडों का खुलासा करना है जो तंबाकू और निकोटीन उद्योग अपने हानिकारक उत्पादों को आकर्षक बनाने के लिए उपयोग करते हैं। उद्योग इन उत्पादों को आकर्षक बनाने तथा स्वाद, महक को बेहतर बनाने के लिए ऐसे तत्व मिलाते हैं जो लती बनाते हैं। इसके साथ ही इसके बाजार को आकर्षक बनाने के लिए सोशल और डिजिटल मीडिया का भी सहारा लिया जा रहा है।
ग्लोबल एडल्ट टोबैको सर्वे 2016-17 के अनुसार देश में लगभग 27 करोड़ लोग तंबाकू का सेवन करते है। देश में तंबाकू सेवन शुरू करने की औसत आयु 18.7 वर्ष है। इसमें भी 13-15 वर्ष की आयु के 2.2 करोड़ किशोर हैं। जब कोई धूम्रपान करता है तो बीड़ी या सिगरेट का धुआं उसको पीने वाले के फेफड़ों में 30 फीसदी व आस-पास के वातावरण में 70 फीसदी रह जाता है। इससे परिवार के लोग और उसके मित्र प्रभावित होते हैं, इसे हम परोक्ष धूम्रपान कहते हैं। महिलाओं की तुलना में पुरूष कम उम्र में तंबाकू का सेवन शुरू कर देते हैं। सेंटर फार डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन के अनुसार सामान्यतः स्मोकर्स की मृत्यु नान-स्मोकर्स की तुलना में दस साल पहले ही हो जाती है।