लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को नॉन-कम्युनिकेबल डिजीज (गैर संचारी रोगों) के बढ़ते मामलों पर गहरी चिंता व्यक्त की। अटल बिहारी वाजपेयी मेडिकल यूनिवर्सिटी में कार्डियोलॉजी सोसाइटी ऑफ इंडिया की ओर से आयोजित नेशनल इंटरवेंशनल काउंसिल कॉन्फ्रेंस का शुभारंभ करते हुए उन्होंने कहा कि प्राचीन भारतीय दिनचर्या समय पर सोना, जागना और पौष्टिक भोजन अब गायब होती जा रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आज लोग देर रात तक जाग रहे हैं और फास्ट फूड व डिब्बाबंद भोजन पसंद कर रहे हैं। औसतन हर व्यक्ति चार से पांच घंटे स्मार्टफोन पर बिता रहा है, जिससे शारीरिक गतिविधियां न्यूनतम हो गई हैं। यही कारण है कि कम उम्र के युवा भी हृदय रोग, डायबिटीज और ब्लड प्रेशर जैसी गंभीर बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं। कार्यक्रम में चिकित्सा शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव अमित घोष, कुलपति डॉ. अमित देवगन, लारी कॉर्डियोलॉजी विभाग के अध्यक्ष डॉ. ऋषि सेट्ठी, सीएसआई के अध्यक्ष डॉ. धीमान कहाली, डॉ. हरेंद्र कुमार बाली, पीजीआई कॉर्डियोलॉजी विभाग के अध्यक्ष डॉ. आदित्य कपूर, डॉ. सतेंद्र तिवारी, डॉ. शरद चन्द्रा, डॉ. गौरव चौधरी डॉ. अखिल शर्मा आदि डॉक्टर मौजूद रहे।
शिक्षकों और रसोइयों को भी मुफ्त इलाज
मुख्यमंत्री ने बताया कि आयुष्मान योजना के दायरे को बढ़ा दिया गया है। इसमें अब शिक्षकों, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, रसोइयों, आशा और एएनएम को भी शामिल किया गया है। वर्ष 2025 में मुख्यमंत्री राहत कोष से इलाज के लिए 1400 करोड़ रुपये आवंटित किए गए। मुख्यमंत्री ने कहा आठ से 10 साल पहले यदि कोई गंभीर बीमारी की चपेट में आता था। तब परिवार पैसे व इलाज की चिंता करता था। विशेषज्ञ डॉक्टर व मेडिकल संस्थानों की कमी थी। अब दोनों ही समस्याओं को हल किया जा रहा है।
अच्छी सेहत के लिए टिप्स दी
सीएम ने कहा कि बीमार भारत आत्मनिर्भर नहीं बन सकता। स्वस्थ नगारिक से ही स्वस्थ समाज होगा। इसलिए अच्छी सेहत के लिए घर की बनी पौष्टिक वस्तुओं का ही सेवन करें। योग करें। समय पर जागने की आदत डालें। स्मार्टफोन का इस्तेमाल रात में न करें। दिन भी जरूरत पर ही प्रयोग करें।
सस्ते इलाज के लिए डिवाइस और फार्मा पार्क
मुख्यमंत्री ने कहा कि यूपी में मरीजों को बेहतर व किफायती दर पर इलाज मिलेगा, इसके लिए प्रदेश सरकार तेजी से मेडिकल डिवाइस और फार्मा पार्क विकसित कर रही है। यहां आईआईटी के इंजीनियर व डॉक्टर शोध के बाद इलाज से जुड़े उपकरण तैयार करेंगे। फार्मा पार्क में दवाओं पर काम होगा। इससे इलाज सस्ता व सुलभ होगा।
डॉक्टर ने सुनाया अपना अनुभव
लारी कॉर्डियोलॉजी विभाग के डॉ. शरद चंद्रा ने अपना अनुभव साझा किया। उन्होंने वर्ष 2005 की घटना साझा कर बताया, दिसंबर की एक रात करीब 10 बजे चंदौसी स्थित उनके घर से पिताजी का फोन आया। कहा कि बेटा सीने में दर्द हो रहा है, क्या करूं? उस वक्त मैं डीएम की पढ़ाई कर रहा था। एक डॉक्टर बेटे के रूप मैंने कहा- कहीं पास में जाकर ईसीजी करा लीजिए। पिताजी ने कहा कि इतनी रात में ईसीजी कहां हो पाएगा। सुबह ही कराएंगे। उस रात सिर्फ मेरे पिताजी ही नहीं, मैं भी जागता रहा। अगले दिन ईसीजी सामान्य आया, लेकिन वह रात मन में एक सवाल छोड़ गई कि क्या हमारे पास समय पर इलाज की व्यवस्था है? डॉ. शरद ने कहा कि दो दशक बाद उसी प्रदेश की तस्वीर बदल चुकी है। अब दिल का दौरा पड़ने पर मरीज को सुबह का इंतजार नहीं करना पड़ता। पहले जहां एंजियोप्लास्टी जैसे इलाज बड़े शहरों तक सीमित थे, अब सुल्तानपुर, जौनपुर, बहराइच, गोंडा और बस्ती जैसे जिलों में भी यह सुविधा उपलब्ध है।
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ।
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ।
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ।
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ।
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ।