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स्मार्ट मीटर की तेजी काट रही ट्रैफिक सिग्नलों की बत्ती, खर्च तय होने के बावजूद सात से आठ दिन पहले ही खत्म हो जा रहा रीचार्ज

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गोमती नगर के 1090 चौराहे पर लगे ट्रैफिक सिग्नल का बिजली बिल पहले करीब नौ हजार रुपये महीना आता था। पर स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगने के बाद यह बहुत बढ़ गया है। सप्ताहभर पहले दो दिन में ही 14 हजार रुपये की बिजली खर्च हो गई।
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परिवर्तन चौक चौराहे पर लगे ट्रैफिक सिग्नल का बिल पहले हर महीने करीब छह हजार आता था, लेकिन अब यह बढ़ गया है। एक सप्ताह पहले 18 हजार रुपये की बिजली रीचार्ज कराई गई, इसके बाद भी मीटर 17 हजार का बकाया दिखा रहा है।
लेसा के स्मार्ट मीटरों की गड़बड़ी ट्रैफिक सिस्टम को फेल कर रही है। मीटरों के तेज भागने के कारण रिचार्ज सात से आठ दिन पहले ही समाप्त हो जा रहा है और सिग्नल हर महीने ठप हो जा रहे हैं।
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शिकायत पर सुनवाई भी नहीं हो रही है। इसे लकर अब लखनऊ स्मार्ट सिटी कंपनी ने लेसा के मुख्य अभियंता ट्रांसगोमती को पत्र लिखकर प्रीपेड मीटर की जगह पोस्टपेड मीटर लगाने की मांग की है। इस मामले को लेकर प्रबंधक निदेशक मध्यांचल को भी पत्र लिखा गया है।
स्मार्ट सिटी कंपनी की ओर से इंटीग्रेटेड ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (आईटीएमएस) का काम एक निजी कंपनी टेक्नोसेस को दिया गया है। यह कंपनी ही टैफिक सिग्नलों का संचालन करती है।
कुछ महीनों से से ट्रैफिक सिग्नल बिजली कट जाने के कारण बंद हो जा रहे हैं। पड़ताल में बिजली मीटरों की तेज रफ्तार का मामला सामने आया है।
इसे लेकर कंपनी ने शिकायत की तो लेसा की ओर से इसे एलएंडटी के मीटर होने का हवाला देकर पल्ला झाड़ लिया गया।
निजी कंपनी से मामले की जानकारी के बाद स्मार्ट सिटी कंपनी के महाप्रबंधक ने लेसा के अफसरों को पत्र लिखे हैं। इसमें आईटीएमएस कंपनी की परेशानी, शिकायत और मांग का हवाला देते हुए कहा गया है कि प्रीपेड मीटर की जगह पोस्टपेड मीटर लगाए जाएं।
खर्च सीमित फिर भी बढ़ रहा बिल, जानकारी भी नहीं मिलती
आईटीएमएस कंपनी के एक प्रतिनिधि ने बताया कि शहर की यातायात व्यवस्था के सिस्टम को स्मार्ट बनाने के लिए शहर में 135 स्थानों पर लगाए गए ट्रैफिक सिग्नलों में 88 स्थानों पर यही समस्या है। ट्रैफिक सिग्नल का बिजली खर्च सीमित है। इसके बावजूद प्रीपेड रीचार्ज सात से आठ दिन पहले ही समाप्त हो जा रहा है। इससे सिग्नल और उसके साथ लगे कैमरे बंद हो जा रहे हैं और यातायात संचालन बिगड़ रहा है। रीचार्ज के लिए जमा कराए गए पैसे की कोई जानकारी पोर्टल पर नहीं मिलती है।
मीटर की खामियों को लेकर उपभोक्ता परिषद भी उठा रही सवाल
राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष व राज्य सलाहकार समिति के सदस्य अवधेश कुमार वर्मा ने बताया कि लखनऊ स्मार्ट सिटी लिमिटेड के महाप्रबंधक परियोजना ने पत्र में बहुत अधिक बिल आने का भी हवाला दिया है। जब स्मार्ट प्रीपेड मीटर का बिल सरकारी विभाग नहीं भर पा रहे हैं तो प्रदेश के 12 लाख स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं का हाल क्या होगा। प्रदेश में हजारों स्मार्ट मीटर उपभोक्ता अपना कनेक्शन भी कटवा चुके है। अभी राजधानी में यह समाने भी आया है कि दर्जनों स्मार्ट मीटर की रीडिंग पीछे हो गई। उपभोक्ता परिषद लगातार प्रदेश के मुख्यमंत्री, ऊर्जा मंत्री और नियामक आयोग से गुहार लगा रही है कि स्मार्ट मीटर परियोजना में ज्यादा खामियां है। फिर भी उच्चाधिकारी स्मार्ट मीटर निर्माता कंपनी व दोषियों को बचाने में लगे हैं।
भेजा गया है पत्र
महाप्रबंधक स्मार्ट सिटी, एससी सिंह ने बताया कि आईटीएमएस का संचालन करने वाली निजी कंपनी ने प्रीपेड मीटर को लेकर परेशानी बताई है। उसने पोस्टपेड मीटर लगाने की मांग की है। उसके पत्र के आधार पर ही लेसा के मुख्य अभियंता व अन्य अधिकारियों को पत्र भेजा गया है।
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