लखनऊ। उत्तर प्रदेश के कुशीनगर में पहली बार ऐसा आयोजन हो रहा है जो छात्रों को अंतरिक्ष का रोमांच सीधे महसूस करने का मौका देगा। भारतीय अंतरिक्ष संवर्धन और प्राधिकरण केंद्र (इन-स्पेस), इसरो और प्रदेश सरकार के संयुक्त प्रयास से राष्ट्रीय स्तर की ‘’इन-स्पेस मॉडल रॉकेट्री प्रतियोगिता’’ आयोजित की जा रही है। नारायणी नदी के किनारे 400 वर्ग मीटर के स्पेशल लॉन्चिंग पैड से 1 किलोग्राम भार वाले 71 कैनसेट (छोटे सैटेलाइट) रॉकेट डेढ़ किलोमीटर ऊंचाई तक उड़ान भरेंगे।
लोकसभा क्षेत्र देवरिया के सांसद शशांक मणि ने प्रेसवार्ता में बताया कि इस आयोजन का उद्देश्य देश में अंतरिक्ष विज्ञान और तकनीक की पहुंच को हर छात्र तक ले जाना है। इस मौके पर इन-स्पेस निदेशक डाॅ. विनोद कुमार और यूपी विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के प्रमुख सचिव पंधारी यादव भी मौजूद थे।
समापन अवसर पर अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला भी रहेंगे
27-30 अक्तूबर तक केरल, तमिलनाडु, गुजरात सहित देशभर के विश्वविद्यालयों और तकनीकी संस्थानों की 71 टीमें इस आयोजन में भाग लेंगी। समापन अवसर पर अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला भी मौजूद रहेंगे। छात्र रॉकेट की लॉनि्चंग, एस्ट्रोनॉट की वेशभूषा और अंतरिक्ष में उनकी दिनचर्या का रियल अनुभव कर सकेंगे।
जागरूकता और उत्साह का मेला डाॅ. विनोद कुमार ने बताया कि ‘’आओ स्पेस साइंस करके सीखें’’ थीम के तहत यह प्रतियोगिता छात्रों को असली अंतरिक्ष मिशन का अनुभव देगी। इससे पहले इन-स्पेस और इसरो ने यूपी के 7 जिलों गोरखपुर, देवरिया, कुशीनगर, जौनपुर, बहराइच, बुलंदशहर और गौतम बुद्ध नगर में जागरूकता अभियान चलाया। इस दौरान ‘’आर्ट-इन-स्पेस’’ और ‘’स्पेस क्विज 20:20’’ प्रतियोगिताओं में 73 हजार से अधिक छात्रों ने भाग लिया।
भविष्य के अंतरिक्ष वैज्ञानिक होंगे तैयार उप्र. विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के प्रमुख सचिव पंधारी यादव ने कहा कि यह आयोजन स्पेस साइंस में रुचि रखने वाले छात्रों के लिए प्रेरणा का काम करेगा। विकसित भारत के लक्ष्य को पूरा करने में स्पेस टेक्नोलॉजी की भूमिका निर्णायक होगी।
रॉकेट्री प्रतियोगिता की जानकारी देते सांसद शशांक मणि। साथ में इन-स्पेस के निदेशक डाॅ. विनोद कुम