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Lucknow News: छोटे कारोबारी तलाश रहे विकल्प, सेटिंगबाजों के यहां रात में उतर रहे सिलिंडर

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गैस के लिए परेशान लोग।
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लखनऊ। व्यावसायिक सिलिंडरों की आपूर्ति पर भले ही रोक लगा दी गई हो, लेकिन रसूखदार और सेटिंगबाज कारोबारियों की अब भी मौज है। इनके लिए एजेंसी वाले आधी रात में गाड़ियों से सिलिंडर उतार रहे हैं।
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सूत्रों के मुताबिक, लालबाग के एक मशहूर रेस्टोरेंट में आधी रात को व्यावसायिक सिलिंडर लदी छोटी गाड़ी पहुंची, जिससे करीब 20 व्यावसायिक सिलिंडर रेस्टोरेंट में उतारे गए, जबकि गाड़ी खाली होने के बाद उसमें खाली सिलिंडर लादे गए। हजरतगंज और गोमतीनगर में भी कई बड़े रेस्टोरेंट व होटल संचालकों को चुपचाप व्यावसायिक सिलिंडर दिए जा रहे हैं। हालांकि, यह सिलिंडर सिर्फ उन कारोबारियों की ही पहुंच तक शामिल हैं, जिनके साथ एजेंसी वालों का अच्छा रिश्ता है। इसके बदले मोटी रकम यह कहकर ऐंठी जा रही है कि उन्हें भी कहीं एडजस्ट करना पड़ रहा है। गैस की किल्लत के बीच कारोबारी भी एजेंसियों से जुड़े प्रतिनिधि व आपूर्तिकर्ताओं की बात स्वीकार ले रहे हैं। नाम न छापने पर इन व्यापारियों व उद्यमियों ने बताया कि उनको भी अपनी दुकान और उद्मम चलाना है। ऐसे में डेढ़ से दोगुना कीमत देने से भी परहेज नहीं कर रहे हैं।
लकड़ी और भट्ठी का विकल्प भी आसान नहीं
गैस की किल्लत के बीच छोटे व मझोले कारोबारी लकड़ी और कोयला भट्ठी की ओर रुख कर रहे हैं, लेकिन यह डगर भी आसान नहीं है। क्योंकि, लगातार बढ़ती मांग की वजह से लकड़ी और कोयला के दाम दोगुने तक हो गए हैं। जो लकड़ी 10 रुपये किलो थी वह अब 20 रुपये किलो में मिल रही है, जबकि 40 रुपये किलो वाला कोयला 80 रुपये में पहुंच गया है। दो हजार की लकड़ी की भट्ठी भी 5-6 हजार रुपये में पहुंच चुकी है। फिर भी समय पर डिलीवरी में संशय है।
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दाम नहीं बढ़ने का किया दावा
यूपी टिंबर एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष मोहनीश त्रिवेदी ने बताया कि लकड़ियों के दाम नहीं बढ़ने दिए जाएंगे। जो व्यापारी जलावन लकड़ी के सहारे अपना व्यापार चल रहे हैं। उन्हें लकड़ी महंगी न मिले। बताया कि जलावन की लकड़ी बेचने वालों से बात हुई है। आपदा के समय सभी लकड़ी व्यापारी देश के साथ खड़े हैं।

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