राजधानी लखनऊ में वर्ष 2023 से लेकर अब तक दो से छह साल के 69 बच्चे लापता हो चुके हैं। ये आंकड़े वे हैं, जिनकी विवेचना एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग (एएचटी) सेल को मिली है। इसके अलावा ऐसे भी तमाम मामले हैं, जिनमें बच्चे घर से निकले मगर कभी लौटे नहीं। इनमें वे मासूम भी शामिल हैं, जिनके अभिभावक गुमशुदगी भी दर्ज नहीं करा सके।
एएचटी सेल में वर्तमान में केवल एक इंस्पेक्टर, 10 उपनिरीक्षक और चार अन्य पुलिसकर्मी तैनात हैं। अधिकारियों का कहना है कि सीमित स्टाफ और तकनीकी संसाधनों की कमी के कारण बड़ी संख्या में लंबित मामलों की जांच प्रभावित होती है। इसके बावजूद टीम लगातार बच्चों की तलाश में हर संभव प्रयास करती है।
एडीसीपी क्राइम किरन यादव ने बताया कि 6 कई बार विभिन्न थानों में दर्ज गुमशुदगी के मामलों में विवेचना में लापरवाही हो जाती है। जब संबंधित थानों से मामले हल नहीं होते तो ह्यूमन ट्रैफिकिंग टीम को दे दिए जाते हैं। तब तक बच्चों की उम्र बढ़ गई होती है है इसलिए उन्हें ट्रेस करने में समस्या आती है। इसके बावजूद टीम बच्चों को ढूंढने का प्रयास करती रहती है। पिछले वर्ष टीम ने 11 बच्चों को खोज निकाला था।