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Lucknow News: स्कूल में छह वर्षीय बच्ची ने सहपाठी को थप्पड़-घूसों से पीटा

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सीसीटीवी फुटेज में कैद बच्चे की पिटाई का वीडियो।  - फोटो : स्रोत : वीडियोग्रैब
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लखनऊ। तेलीबाग वृंदावन सेक्टर-6ए स्थित एएलएस एकेडमी स्कूल में बुधवार को नर्सरी में पढ़ने वाली छह वर्षीय क्लास मॉनिटर बच्ची ने अपने एक सहपाठी बच्चे की 10 मिनट तक थप्पड़-घूसों से पिटाई की। पिटाई से पीड़ित बच्चे के मुंह, गाल, आंख में चोटें आई हैं। बच्चे की हालत खराब हुई तो परिजन उसे पीजीआई के ट्राॅमा सेंटर ले गए जहां उसका इलाज किया गया।
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वृंदावन सेक्टर-6 के बृज विहार निवासी बृजेंद्र कुमार के अनुसार, उनका पांच वर्ष का बेटा एएलएस एकेडमी में नर्सरी का छात्र है। बुधवार को बेटा स्कूल से घर लौटा तो उसका चेहरा चोटों के कारण सूजा हुआ था। स्कूल में शिकायत की गई तो क्लास के सीसीटीवी को चेक किया गया। उसमें दिखा क्लास की मॉनिटर बच्ची ने बेटे के साथ बुरी तरह से मारपीट की। बृजेंद्र ने घटना का विरोध किया तो आरोपी बच्ची के परिजनों को बृहस्पतिवार स्कूल बुलाया गया और बच्ची को निष्कासित कर दिया गया।

सिर के बाल खींचते हुए की पिटाई
सीसीटीवी फुटेज में दिखा कि आरोपी बच्ची ने पहले क्लास रूम का दरवाजा बंद किया। अन्य बच्चों को टेबल पर सिर झुकाने के लिए कहा। इसके बाद आरोपी बच्ची ने बृजेंद्र के बेटे का पीटना शुरू कर दिया। उसके सिर के बाल खींचते हुए थप्पड़ और घूसों की बरसात कर दी। यह दृश्य देख पीड़ित बच्चे के माता-पिता के साथ शिक्षक भी हैरान रह गए। शिक्षकों के अनुसार, इससे पहले बच्ची ने कभी ऐसी हरकत नहीं की थी। उसका व्यवहार भी सामान्य ही रहता था।
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सीसीटीवी में घटना को देखा। मारपीट करने वाली बच्ची को विद्यालय से निष्कासित कर दिया है। आगे से इस प्रकार की कोई गलती ना हो इसका ध्यान रखा जाएगा।
आशा सिंह बिष्ट,
प्रधानाचार्य

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सीसीटीवी फुटेज को मैंने भी देखा। मुझे भी बहुत हैरानी हुई। ऐसा क्या कारण था जो बच्ची ने ऐसा कदम उठाया, इस संबंध में विद्यालय से जवाब मांगा जाएगा।
विपिन कुमार,
बेसिक शिक्षा अधिकारी

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मनोवैज्ञानिक बोले... हिंसक गेम और वीडियो बच्चों के मन पर डालते हैं नकारात्मक असर
वरिष्ठ मनोचिकित्सक डॉ. देवाशीष शुक्ला का कहना है कि बच्चों की परवरिश और उनकी डिजिटल गतिविधियों पर लापरवाही भविष्य में गंभीर समस्या बन सकती है। सोशल मीडिया तथा अन्य प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कई हिंसक गेम और वीडियो बच्चों के कोमल मन पर नकारात्मक असर डालते हैं। खासकर गेम में बार-बार सुनाई देने वाली मारो, शूट करो जैसी आवाजें और हिंसक दृश्य बच्चों के व्यवहार को प्रभावित कर सकते हैं। उनमें आक्रामकता बढ़ा सकते हैं। यह जरूरी है कि अभिभावक बच्चों के स्क्रीन टाइम, देखी जाने वाली सामग्री और व्यवहार पर नजर रखें। स्कूलों में शिक्षक भी बच्चों के स्वभाव में अचानक आए बदलाव, गुस्से या हिंसक प्रवृत्ति को गंभीरता से लें और समय रहते अभिभावकों को जानकारी दें।
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