लखनऊ। ये तीन तो महज उदाहरण है। ऐसे जिले में करीब छह हजार राशनकार्ड धारक परिवार हैं, जिनके परिवार के सदस्यों में कोई नौकरीपेशा है या व्यवसायी। पारिवारिक आय भी तीन लाख रुपये से अधिक है या फिर चार पहिया वाहन के स्वामी हैं, लेकिन वह भी गरीबों के लिए आया मुफ्त राशन लेते आ रहे थे। बैंक अकाउंट से आधार लिंक होने पर पकड़ में आने के बाद अब जल्द ही ऐसे लोगों का नाम राशनकार्ड धारकों की सूची से काटा जाएगा।
केस-01 :
शहर के मोहल्ला पंतनगर निवासी राशनकार्ड धारक सुधा वर्मा काफी समय से सरकार से प्रतिमाह मिलने वाला मुफ्त खाद्यान्न प्राप्त करती आ रही हैं, लेकिन पूर्ति विभाग की ओर से कोटेदार को उपलब्ध कराई गई सूची में उनके परिवार की आय तीन लाख रुपये से अधिक बताई गई है। बताया जाता है कि उनका पुत्र नौकरीपेशा है।
केस-02
खुर्रमनगर निवासी अजरा खातून भी काफी समय से पात्र गृहस्थी राशनकार्ड धारक हैं। हर माह वह मुफ्त राशन भी प्राप्त करती हैं। बताया जाता है कि उनके पति हाल ही में रिटायर्ड हुए हैं। पुत्र भी व्यवसाय करता है। पूर्ति विभाग से प्राप्त सूची में इनकी आय तीन लाख रुपये से अधिक है। कोटेदार के कहने के बाद भी उन्होंने इस आशय का शपथपत्र नहीं दिया है कि वह अपात्र नहीं हैं।
केस:03
ग्राम शिवरी निवासी शांति देवी पत्नी राकेश पात्र गृहस्थी राशनकार्ड धारक हैं। बताया जाता है कि इनका पुत्र अरविंद सेना में है। वह भी मुफ्त राशन प्राप्त कर रही हैं। इस बार सूची में उनका नाम अपात्र की श्रेणी में आया है।
इनका नाम भी अधिक आय में शामिल
नगर पंचायत इटौंजा की रामदेवी, सरिता, पूजा गुप्ता, अमिता, मुन्नी देवी, ग्राम पंचायत सरायदामू निवासी सरिता सिंह तोमर, निशा कुशवाहा, जानकी देवी आदि।
Iकरीब छह हजार ऐसे राशनकार्ड धारक चिह्नित किए गए हैं, जिनकी आय दो लाख रुपये से अधिक है। इसमें कुछ व्यवसायी तो कुछ के परिजन नौकरीपेशा वाले हैं। इस बार किसी का राशन नहीं रोका गया है, लेकिन सबसे शपथ पत्र मांगा जा रहा है। विभागीय टीम भी जांच कर रही है। अपात्र लोगों का जल्द ही राशनकार्ड निरस्त किया जाएगा। उनके स्थान पर नए पात्र लोगों को राशनकार्ड जारी किए जाएंगे।I
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विजय प्रताप सिंह, जिला पूर्ति अधिकारी लखनऊ
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