जगदीश चंद्र, हरगोविंद और राजेंद्र कुमारी।
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सीतापुर से दिल्ली का सफर तय करने वाले तीन सांसद ही अब तक चुनावी पिच पर ''50'' बना सके हैं। कुल मतों में से 50 फीसदी का आंकड़ा छूने वाले दो सांसद कांग्रेस जबकि एक एलकेडी के रहे। आखिरी बार 1984 में लोकसभा का दंगल फतह करने वाली राजेंद्र कुमारी बाजपेई ने 50 फीसदी वोट हासिल किए थे। पिछले 40 साल से कोई सांसद यह करिश्मा नहीं कर पाया है।
संसदीय सीट सीतापुर को अपना पहला सांसद 1951 में मिला था। अब तक यहां 17 लोकसभा के चुनाव हो चुके हैं। जिसमें 194 उम्मीदवारों ने अपनी किस्मत आजमाई है। इस दरम्यान कुल मतदान में 50 फीसदी के जादुई आंकड़े तक महज तीन सांसद ही पहुंचने में कामयाब रहे हैं। पहली बार कांग्रेस के जगदीश चंद्र दीक्षित और आखिरी बार राजेंद्र कुमारी बाजपेई ने 50 फीसदी का आंकड़ा छुआ था। एलकेडी सांसद हरगोविंद वर्मा का नाम भी इस फेहरिस्त में शुमार है। सबसे ज्यादा मत पाने का हरगोविंद का रिकॉर्ड आज तक कायम है।
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जगदीश चंद्र को मिले थे 56.67 फीसदी वोट
कांग्रेस प्रत्याशी जगदीश चंद्र दीक्षित ने 1971 के चुनाव में पहली बार 50 फीसदी से ऊपर वोट हासिल किए थे। इस चुनाव में 10 उम्मीदवार मैदान में थे। कुल 235388 मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया था। जगदीश चंद्र दीक्षित ने 56.67 फीसदी मत पाकर कुर्सी कब्जा जमाया था। भारतीय जन संघ के उम्मीदवार जयनारायण 33.92 फीसदी मतों के साथ दूसरे स्थान पर रहे थे।
हरगोविंद ने हासिल किए थे 62.73 फीसदी मत
एलकेडी के उम्मीदवार हरगोविंद वर्मा ने 1977 के चुनाव में यह करिश्मा किया था। इस चुनाव में 316664 मतदाताओं ने वोट डाले थे। इस चुनाव में पांच उम्मीदवारों ने किस्मत आजमाई थी। इसमें हरगोविंद को 62.73 फीसदी मत मिले थे। इन्होंने तत्कालीन सांसद जगदीश चंद्र को हराया था। कांग्रेस के जगदीश चंद्र को 27.24 फीसदी मतों से ही संतोष करना पड़ा था। यह रनर रहे थे।
राजेंद्र कुमारी बाजपेई को मिले थे 50.25 प्रतिशत वोट
कांग्रेस की राजेंद्र कुमारी बाजपेई ने सीतापुर संसदीय सीट के इतिहास में आखिरी बार यह करिश्मा किया था। वर्ष 1984 के चुनाव में 11 प्रत्याशी मैदान में थे। इस चुनाव में कुछ 379569 मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया था। कांग्रेस की राजेंद्र कुमारी ने 50.25 प्रतिशत मत हासिल किए थे। एलकेडी के हरगोविंद वर्मा 25.01 फीसदी मतों के साथ दूसरे स्थान पर रहे थे।