पुलिस मुठभेड़ में ढेर हुए दोनों आरोपी।
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राघवेंद्र की हत्या में आठ अंक का अजब संयोग है। आठ मार्च को उनकी हत्या हुई। राघवेंद्र की हत्या से लेकर शूटरों के एनकाउंटर तक आठ ही गोलियों का इस्तेमाल हुआ। चार गोलियां राघवेंद्र को लगीं और चार ही गोलियों में दोनों शूटर भी ढेर हो गए। राघवेंद्र की बाइक का नंबर भी 8005 है। आठवें महीने में पुलिस ने आरोपियों को मार गिराया। आठ अगस्त को ही शूटरों का अंतिम संस्कार होगा।
नाजिमा से शादी कर कृष्ण गोपाल तिवारी बन गए थे करीम खान
अटवा निवासी 95 वर्षीय रामप्रसाद शुक्ला ने बताया कि शूटरों के पिता कृष्ण गोपाल तिवारी को नाजिमा से प्रेम हो गया था। नाजिमा के प्यार में पड़ कर उन्होंने अपना नाम करीम खान रख लिया था। कृष्ण गोपाल ने नाजिमा से विवाह नहीं किया था। बस दोनों साथ रहते थे। दोनों से तीन पुत्र संजय, राजू व राहुल हुए। पुत्री की मौत हो गई थी।
हत्यारों के एनकाउंटर पर एसपी अंकुर अग्रवाल ने मीडिया को संबोधित किया।
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एसपी सीतापुर अंकुर अग्रवाल का कहना है कि एसओजी व एसटीएफ की संयुक्त टीम को अपर पुलिस महानिदेशक लखनऊ जोन की ओर से 50 हजार रुपये, आईजी रेंज की ओर से 25 हजार रुपये व मेरी ओर से 25 हजार रुपये का नकद पुरस्कार दिया जाएगा। सभी को सम्मानित किया जाएगा। राघवेंद्र हत्याकांड में यह दोनों शूटर पुलिस के लिए चुनौती थे। यह पुलिस टीम के लिए बड़ी कामयाबी है।