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कानपुर सिख दंगों के छह केस बंद करेगी एसआईटी, सुबूत व गवाह न मिलने के कारण फैसला

Thu, 26 Mar 2020 03:19 PM IST
ishwar ashish न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
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कानपुर के सिख दंगों की जांच कर रही एसआईटी ने छह केसों की जांच बंद करने का फैसला किया है। ऐसा इन मामलों में सुबूत व गवाह न मिलने के कारण किया जा रहा है। एसआईटी इसके साथ ही छह नए केसों की जांच शुरू करने की तैयारी में है।

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इनमें उसे कुछ गवाह मिले हैं। इनके जरिए एसआईटी नए मामलों में साक्ष्य हासिल करने की उम्मीद कर रही है। इसके लिए उसने जिला न्यायाधीश को आवेदन देकर नए केसों की एफआईआर व अन्य दस्तावेज मुहैया कराने का आग्रह किया है।

जांच प्रक्रिया से जुड़े अधिकारियों के अनुसार एसआईटी प्रदेश सरकार के आदेश पर कानपुर में 1984 में हुए सिख विरोधी दंगों की दोबारा जांच के तहत दस मामलों की विवेचना कर रही है। इनमें पांच मामलों में निचली अदालतों के फैसलों को लेकर उच्च न्यायालय में चुनौती दी जा चुकी है।
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इन पांचों में से एक में अपील दाखिल की जा चुकी है। इन केसों में अधीनस्थ न्यायालयों ने या तो मामूली सजा तय की थी या आरोपियों को दोषमुक्तकर दिया था। उच्च न्यायालय में अपील के लिए एसआईटी प्रदेश सरकार से अनुमति मांग चुकी है।

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स्थानीय पुलिस ने 153 मामलों को छोड़ अन्य में क्लोजर रिपोर्ट लगा दी

कानपुर में हुए सिख विरोधी दंगों में 127 लोगों की हत्या हुई थी। इसे लेकर 1,251 मुकदमे दर्ज हुए थे। स्थानीय पुलिस ने इनमें से 153 मामलों को छोड़ अन्य में क्लोजर रिपोर्ट लगा दी थी। एसआईटी ने विवेचना शुरू करने के बाद कानपुर पुलिस से दंगे की जांच से जुड़े दस्तावेज हासिल किए थे।

इस मामले में बंद किए गए केसों की विशेषज्ञ एजेंसी से जांच कराने के लिए अखिल भारतीय सिख दंगा पीड़ित राहत कमेटी के अध्यक्ष कुलदीप सिंह भोगल और दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के तत्कालीन अध्यक्ष मंजीत सिंह ने सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दायर की थी। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को एसआईटी गठित कर जांच कराने के आदेश दिए थे।
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