कानपुर में हुए सिख विरोधी दंगों में 127 लोगों की हत्या हुई थी। इसे लेकर 1,251 मुकदमे दर्ज हुए थे। स्थानीय पुलिस ने इनमें से 153 मामलों को छोड़ अन्य में क्लोजर रिपोर्ट लगा दी थी। एसआईटी ने विवेचना शुरू करने के बाद कानपुर पुलिस से दंगे की जांच से जुड़े दस्तावेज हासिल किए थे।
इस मामले में बंद किए गए केसों की विशेषज्ञ एजेंसी से जांच कराने के लिए अखिल भारतीय सिख दंगा पीड़ित राहत कमेटी के अध्यक्ष कुलदीप सिंह भोगल और दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के तत्कालीन अध्यक्ष मंजीत सिंह ने सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दायर की थी। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को एसआईटी गठित कर जांच कराने के आदेश दिए थे।