वाराणसी के सुड़िया स्थित सरस्वती इंटर कॉलेज में नियम विरुद्ध तरीके से पांच सहायक अध्यापकों की नियुक्ति के मामले में राज्य एसआईटी ने दो तत्कालीन डीआईओएस, शिक्षा विभाग के संयुक्त निदेशक, दो प्रधान सहायकों समेत 10 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है।
वाराणसी के सुड़िया स्थित सरस्वती इंटर कॉलेज में नियम विरुद्ध तरीके से पांच सहायक अध्यापकों की नियुक्ति के मामले में राज्य एसआईटी ने दो तत्कालीन डीआईओएस, शिक्षा विभाग के संयुक्त निदेशक, दो प्रधान सहायकों समेत 10 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। कॉलेज के प्रधानाचार्य महेश तिवारी की शिकायत पर इस प्रकरण की जांच पांच वर्ष पूर्व वाराणसी के अपर आयुक्त से कराई गई थी, जिसमें नियुक्तियों को अवैध करार दिया गया था।
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अपर आयुक्त ने अपनी रिपोर्ट में सहायक अध्यापक के पद पर चयनित अखिलेश कुमार मिश्रा, निवेदिता पांडेय, नीतू सिंह, नीलम यादव और मुन्नालाल की नियुक्तियों को अवैध बताया था। तत्पश्चात प्रमुख सचिव माध्यमिक शिक्षा ने इसकी जांच राज्य विशेष अनुसंधान दल से कराने का अनुरोध किया था। शासन ने एसआईटी को चार माह पूर्व इसकी जांच सौंपी थी। एसआईटी के निरीक्षक अरुण कुमार राय ने जांच के पश्चात सौंपी अपनी रिपोर्ट में बताया कि वर्ष 2014 में कॉलेज के प्रबंधक रामगोपाल बहल ने सहायक अध्यापकों की नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू करने के लिए डीआईओएस से अनुमति मांगी थी। अनुमति नहीं मिलने पर प्रक्रिया निरस्त कर दी गई। रामगोपाल के निधन के बाद उनके स्थान पर प्रबंधक बने रतन कपूर ने दोबारा डीआईओएस से इसके लिए अनुरोध किया। आरोप है कि उन्होंने डीआईओएस और शिक्षा विभाग के अधिकारियों एवं कर्मचारियों से साठगांठ कर नियुक्तियां कर ली। इसके लिए अनुमति मिलने के कूटरचित दस्तावेज तैयार किए गए।
इनके खिलाफ दर्ज हुआ मुकदमा
वाराणसी के तत्कालीन डीआईओएस ओपी राय (वर्तमान में प्रतापगढ़ में तैनात), तत्कालीन डीआईओएस चंद्रजीत सिंह यादव (सेवानिवृत्त), वाराणसी मंडल के तत्कालीन संयुक्त शिक्षा निदेशक अजय कुमार द्विवेदी (वर्तमान में बरेली मंडल में तैनात), सहायक शिक्षा निदेशक (बेसिक) के प्रधान सहायक बच्चू सिंह यादव, प्रधान सहायक बहादुर पटेल, नीतू सिंह, मुन्ना लाल, निवेदिता पांडेय, अखिलेश कूुमार मिश्रा, नीलम पांडेय के खिलाफ धोखाधड़ी, कूटरचित दस्तावेज तैयार करने, आपराधिक साजिश रचने समेत कई धाराओं में मुकदमा दर्ज कर विवेचना शुरू कर दी गई है।