फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

ये ससुराल बना मिसाल, बहु को करने दी 'मनमर्जी'!

Mon, 24 Nov 2014 03:07 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
विज्ञापन
विज्ञापन
छोटे भाई की जिंदगी बचाने के लिए अपना एक गुर्दा देकर कुसुम मिसाल बन गई। तीन बच्चे, पति, सास-ससुर वाले भरे पूरे परिवार की गृहलक्ष्मी ने अपने नैहर के लिए जो कर दिया वो कोई और नहीं कर पाया।
विज्ञापन


कुसुम ने जो किया वो तो काबिल-ए-तारीफ है ही लेकिन उनका ससुराल पक्ष भी उतना ही सम्मान पाने लायक है। पति चार दिन से अस्पताल में साथ है, रविवार को ससुर भी कुसुम का हालचाल लेने अंबेडकर नगर से शताब्दी अस्पताल पहुंचे थे।

पिता और परिवार के अन्य लोग भी कुसुम और खुशीराम की सेवा में लगे हैं। ये कहानी है अंबेडकर नगर की अकबरपुर तहसील के छोटे से गांव के एक किसान परिवार की।

इस परिवार में माता-पिता के अलावा तीन भाई और उनकी इकलौती बहन कुसुम थी।

किसी की नहीं सुनी बिटिया ने

इनमें से सबसे छोटे खुशीराम के गुर्दे फेल हो गए। पहले तो डायलिसिस हुई और दवा चली। जब बात ट्रांसप्लांट की आ गई तो पूरा परिवार किडनी देने के लिए राजी हो गया। पत्नी का ब्लड ग्रुप मैच नहीं किया।

माता-पिता की किडनी तकनीकी कारणों से नहीं प्रत्यारोपण के लिए लायक नहीं मिली। जब सब निराश हो गए तो खुशीराम का जीवन बचाने के लिए उम्मीद की किरण बनकर आयी घर की सबसे प्यारी बिटिया कुसुम।

उसने अपना एक गुर्दा छोटे भाई का जीवन बचाने के लिए देने के लिए कहा। इस पर पिता ने उससे कहा कि अब तुम पराया धन हो। हम लोग ऐसा नहीं कर सकते। लेकिन कुसुम नहीं मानी।

उसके 16 और 11 साल के दो बेटे और नौ साल की एक लड़की है। पति किसान हैं। ससुर सरकारी नौकरी से रिटायर हैं। उसने अपने पिता संतराम के साथ ही पूरे परिवार को गुर्दा देने की बात के लिए मना लिया।

इसके बाद से खुशीराम को गुर्दा प्रत्यारोपण के लिए तैयारी शुरू कर दी गई। 22 नवंबर को कुसम का गुर्दा लेकर खुशीराम को लगा दिया गया।
विज्ञापन

सिक्योरटी गार्ड को निकल आए आंसू

संतराम ने बताया कि उसकी बिटिया की इस दिलेरी का चर्चा पूरे अस्पताल में है। वो रविवार सुबह दवा लेकर बाहर से आ रहा था तो गेट पर खड़े गार्ड और कुछ लोग उसकी बेटी के बारे में बात कर रहे थे।

गार्ड वहां मौजूद लोगों को कुसुम की दरियादिली के बारे में बताते रोने लगा। सभी यही चर्चा कर रहे थे कि भाई के लिए बहन ने अपना गुर्दा दिया है।

उन लोगों की बातें सुनकर पिता के आंसू भी निकल आए। खुशीराम के पिता ने बताया कि अब उन्हें बेटी की और भी ज्यादा चिंता है। उन्होंने बताया कि कुसम से बड़े दो भाई राजेंद्र कुमार और नंदलाल हैं। सभी ने मिलकर खुशीराम के इलाज में मदद दी है।

नम आंखों से आंसू पोछते हुए संतराम ने बताया कि खुशीराम का इलाज कराते-कराते एक साल हो गया है। पिछले जाड़े में ही रात को अचानक उसकी तबीयत बिगड़ी थी।

कुसुम जैसी बेटी के पिता होने पर गर्व कर रहे संतराम ने कहा कि वो घर में सबको प्यारी थी। उसने अपना गुर्दा दानकर सबको ऋणी कर दिया।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें